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जयपुर में प्रदीप मिश्रा ने तीसरे दिन ही रोकी कथा:7 मई तक चलनी थी, कथावाचक बोले- हमें समर्थन नहीं मिला; यूपी प्रशासन ने पूरा सहयोग किया था

जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में चल रही कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा तीसरे दिन ही समाप्त हो गई। शनिवार को प्रदीप मिश्रा ने मंच से इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा- इससे बड़ी कथा हमने यूपी में की थी, वहां का प्रशासन पूरी तरह सहयोगी था, लेकिन जयपुर में हमें ऐसा समर्थन नहीं मिला।

1 मई को को शुरू हुई कथा 7 मई तक चलनी थी। आयोजन समिति के सचिव अनिल संत ने बताया- पुलिस ने आयोजन में सहयोग करने की बजाय लगातार अड़चनें खड़ी कीं। हमारी ओर से पूरी व्यवस्थाएं थीं, लेकिन पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए थे। यहां तक कि पुलिस ने अपने लोगों को कथास्थल पर आगे की पंक्तियों में बैठा दिया। हमारे स्वयंसेवकों को अंदर नहीं जाने दिया।

शुक्रवार को प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने के लिए लोग आसपास की निर्माणाधीन बिल्डिंग पर चढ़ गए थे।
शुक्रवार को प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने के लिए लोग आसपास की निर्माणाधीन बिल्डिंग पर चढ़ गए थे।

कथा के दो दिन प्रदीप मिश्रा ने क्या-क्या कहा…

बाहर का पहनावा राजस्थान में न लाएं बेटियां कथा के पहले दिन 1 मई को प्रदीप मिश्रा ने कहा था- मैं आज राजस्थान की भूमि पर जयपुर से अपनी बेटियों को कहना चाहूंगा कि आप पहनावे का बहुत ध्यान रखें। आप कितने भी बड़े और विकासशील हो जाएं। आप बाहर की सभ्यता और बाहर का पहनावा राजस्थान में मत लेकर आना।

लड़कियों की नाभि ढकी रहेगी, सुरक्षा बनी रहेगी कथा के दूसरे दिन प्रदीप मिश्रा ने कहा था- अगर तुलसी के पौधे की जड़ दिखने लगे तो वह पौधा मर जाता है। वैसे ही लड़कियों की नाभि भी शरीर की जड़ है। उसे वस्त्र (कपड़े) से ढककर रखना चाहिए। जितना ढका रहेगा, उतनी सुरक्षा बनी रहेगी। आज के समय में अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? इसका कारण पहनावा है। दुनिया की कोई सरकार या प्रशासन क्राइम नहीं रोक सकता, उसे घर के संस्कार ही रोक सकते हैं। विद्याधर नगर स्टेडियम में सात दिवसीय शिवमहापुराण कथा के दूसरे दिन प्रदीप मिश्रा ने ये बात कही।

प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने बड़ी संख्या में महिलाएं विद्याधर नगर स्टेडियम पहुंचीं थीं।
प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने बड़ी संख्या में महिलाएं विद्याधर नगर स्टेडियम पहुंचीं थीं।

हाईटेक पंडाल बनाया था विद्याधर नगर स्टेडियम के पीछे 400×700 फीट के तीन और 60×600 फीट का एक पंडाल तैयार किए गए थे। इस पंडाल की कुल क्षमता 1.5 लाख लोगों की थी। पंडाल को स्पेशल जर्मन टेक्नोलॉजी के जैक सिस्टम से बनाया गया था, जो 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी और बारिश को भी झेल सकता था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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