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नाबालिग से रेप के आरोपी किशोर को जमानत:पॉक्सो कोर्ट ने कहा-पीड़िता के बयानों में विरोधाभास, आईओ के खिलाफ जांच के आदेश

नाबालिग से रेप के मामले में जेल में बंद किशोर को जयपुर महानगर प्रथम की पॉक्सो कोर्ट-2 ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया हैं। जज तिरुपति गुप्ता ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता के पुलिस और कोर्ट के समक्ष दिए गए बयानों में विरोधाभास हैं। इसके साथ ही चाइल्ड होम केयर के ऑब्जर्वर की रिपोर्ट भी बयानों से अलग है।

मामले में चालान पेश हो चुका हैं। ऐसे में क्या सही है और क्या गलत। इसका निर्धारण ट्रायल के दौरान ही हो सकेगा, जिसमें समय लगने की संभावना हैं। ऐसे में किशोर को जमानत दी जाती हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में मामले के अनुसंधान अधिकारी (आईओ) की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए।

पीडिता के बयानों में विरोधाभास मामले से जुड़े अधिवक्ता दीपांशु शर्मा और भवानी सैनी ने बताया कि पुलिस के अनुसार किशोर पीड़िता को बहला फुसलाकर 7 अक्टूबर 2024 को अपने गांव मध्यप्रदेश के सागर जिले में ले गया। जहां उसने पीड़िता को 19 दिन रखा। इस दौरान उसने पीड़िता के साथ 5 से 6 बार दुष्कर्म किया। वहीं 26 अक्टूबर 2024 को पुलिस ने आरोपी के घर से पीड़िता को बरामद किया।

लेकिन हमने कोर्ट को बताया कि पीड़िता ने पुलिस को दिए गए बयानों में कहीं भी नहीं कहा कि किशोर उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था। वहीं चाइल्ड केयर होम ऑब्जर्वर की रिपोर्ट भी कहती है कि पीड़िता की काउंसलिंग में उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से किशोर के साथ उसके गांव गई थी।

लेकिन पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों में कहा कि किशोर उसे जबरन अपने साथ ले गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। किशोर 29 अक्टूबर 2024 से कस्टडी में हैं। वह भी नाबालिग है। ऐसे में उसे जमानत दी जाए।

जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश अधिवक्ता चिराग अग्रवाल ने बताया कि मामले में पुलिस जांच पर भी कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। जांच अधिकारी ने पीड़िता को बरामद करने की अपनी दस्तयाब रिपोर्ट में कहा कि पीड़िता स्वंय अपने परिजनों के साथ थाने में उपस्थित हुई।

लेकिन केस डायरी में जांच अधिकारी ने लिखा कि वह पुलिस जाब्ते और परिजनों के साथ किशोर के गांव गया था। जहां से पीड़िता को किशोर के घर से बरामद किया गया। इस पर कोर्ट ने डीसीपी साउथ को जांच अधिकारी एएसआई राजकुमार के खिलाफ मिथ्या दस्तावेजों तैयार करने पर कठोर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए भी कहा हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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