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नाबालिग बेटी से रेप करने वाले कलयुगी पिता को उम्रकैद की सजा, कोर्ट ने रामचरितमानस की चौपाई लिखकर दिया उदाहरण; पीड़िता के लिए लिखा…काली अंधेरी रात गुजर चुकी

कोटा: कोटा में नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले कलयुगी पिता को पॉक्सो कोर्ट क्रम संख्या 3 ने ता उम्र कैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 44 वर्षीय आरोपी को अंतिम सांस तक कारावास की सजा व 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है. गत मार्च के महीने में आरोपी ने अपनी नाबालिग बेटी को अकेली देखकर उससे जबरदस्ती रेप किया. दरिंदे पिता ने पांच साल तक नाबालिग बेटी को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया था.

तीन महीने बाद बेटी ने हिम्मत दिखाते हुए उधोग नगर थाने में शिकायत दी थी. कोर्ट में 7 महीने की सुनवाई में फैसला सुनाया. कोर्ट ने पीड़िता को 10 लाख की आर्थिक सहायता की भी अनुशंसा की. विशिष्ट लोक अभियोजक ललित कुमार शर्मा ने बताया, फैसले में कोर्ट ने टिप्पणी में बाली वध के प्रसंग के दौरान रामचरितमानस की चौपाई लिखी है -कोर्ट ने लिखा मरते समय बाली ने श्रीराम से पूछा, आपने मेरा वध क्यों किया, जब श्रीराम ने बाली से कहा–
 “अनुज वधु भागिनी सत नारी,
सुनु सठ कन्या सम ऐ चारी
इन्हहि कुदृष्टि बिलोकई जोई
ताहि वध कछु पाप न कोई”

अर्थात्
छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी, और अपनी पुत्री इन चारों में कोई अंतर नहीं है. किसी भी पुरुष के लिए ये एक समान होनी चाहिए. इन पर अपनी कुदृष्टि रखने वाला या इनका अपमान करने वाले का वध करना पाप की श्रेणी में नहीं आता.

मामला 19 दिसंबर 2022 का है. पीड़िता की मां और छोटी बहन बाजार गई थी. इस दौरान पीड़िता रसोई में खाना बना रही थी. शाम 6 बजे उसके पिता ने उसे जबरन पकड़ लिया और अंदर कमरे में ले जा कर रेप किया. पीड़िता ने अपने बयानों में बताया कि 14 साल की उम्र से ही पिता उससे दुष्कर्म करता आ रहा है. पुलिस ने पिता को गिरफ्तार कर कोर्ट में उसके खिलाफ चालान पेश किया.

वहीं कोर्ट ने आदेश में लिखा कि होनहार बेटी को संदेश देना चाहती है. आदेश में लिखा गया- कोर्ट होनहार बेटी को संदेश देना चाहती है. हमारी बिटिया रानी तुम होनहार खिलाड़ी हो, विपरीत परिस्थितियों में साहस व धैर्य के साथ लड़ना और विजयी होना तो तुम्हारे खून में है. चलो उठो काली अंधेरी रात गुजर चुकी है. आशाओं का सूरज नई किरण के साथ तुम्हें बुला रहा है. आगे बढ़ो, थाम लो अपनी खुशहाल जिंदगी का दामन और आशाओं के उन्मुक्त आसमान में उड़कर अपने सपनों को साकार करो.

 

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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