राजस्थान एमडी ड्रग्स बनाने का नया ठिकाना बनता जा रहा है। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के इलाकों में महाराष्ट्र के माफिया की मदद से यहां तस्कर ड्रग्स का साम्राज्य बसाने में लगे हैं।
बेखौफ इतने की हॉलीवुड-बॉलीवुड मूवीज की तरह यहां ड्रग्स बनाने की फैक्ट्रियां बनाईं जा रही हैं। मंगलवार को बाड़मेर एकदम तैयार फैक्ट्री में पुलिस ने छापा मारा तो सभी के होश उड़ गए।
यहां मिली मॉडर्न मशीनरी और केमिकल से 40 करोड़ की एमडी ड्रग्स बननी थी। इनामी तस्कर रमेश उफ रामलाल ने इंटरनेशनल बॉर्डर से 32 किलोमीटर दूर सेड़वा थाना क्षेत्र में ये फैक्ट्री लगाई थी।
तस्कर पहले जैसलमेर एरिया में फैक्ट्री लगाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने एक महीने तक रेकी भी की। फिर बाड़मेर के इस सुनसान एरिया में फैक्ट्री लगाई गई। फैक्ट्री के बाहर कार्रवाई के दौरान खड़े पुलिसकर्मी।
सबसे पहले पढ़िए- स्मगलरों का प्लान
बाड़मेर एसपी नरेंद्र मीना ने बताया कि पुलिस के पास जानकारी थी कि धोलकिया गांव की ढाणी में ड्रग्स की फैक्ट्री है। जहां फैक्ट्री है उसके तीन किलोमीटर के दायरे में कोई नहीं रहता है।
इसलिए ये एक सेफ हाउस था। मंगलवार दोपहर एक बजे दबिश दी तो मुंबई से लाई गईं करोड़ों की मशीनें और केमिकल मिला। पुलिस ने दो स्मगलरों को भी यहां से पकड़ा है।
जबकि एक मौके से फरार हो गया। इसके बाद शाम को नारकोटिक्स ब्यूरो (NCB) की टीम पहुंची। जानकारी के अनुसार बुधवार से यहां ड्रग्स बनना शुरू होना था। सोमवार- मंगलवार को यहां मशीनों की टेस्टिंग चल रही थी।
ये है वो रास्ता जहां से ड्रग फैक्ट्री तक पुलिस पहुंची। इस एरिया में 3 किमी तक कोई मकान नहीं है।
एक लाख का ईनामी तस्कर है मास्टरमाइंड
पुलिस के अनुसार कुख्यात तस्कर रमेश उर्फ रामलाल उर्फ अनिल कुमार ड्रग्स फैक्ट्री का मुख्य सरगना है। लंबे समय से तस्करी के कारोबार में लिप्त रहा है। इसके खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में 13 मुकदमे है।
धोरीमन्ना, चौहटन, गुड़ामालानी व सेड़वा इलाके में जब एमडी-स्मैक की जद में युवाओं को फंसाया तो डिमांड बढ़ने लगी। ऐसे में ड्रग की फैक्ट्री खोलने के लिए ही पूरा सेटअप तैयार करवाया।
मुंबई के बृजेश उर्फ बिरजू को फैक्ट्री का सेटअप करने लिए बुलाया। पिछले करीब एक माह से सेटअप चल रहा था। इसके बाद ड्रग्स बनाने के लिए केमिकल से भरे ड्रम, पाउडर सहित अन्य सामग्री को लाया गया। रमेश पर पुलिस ने 1 लाख रुपए का ईनाम है। पुलिस को 2018 से इसकी तलाश है।
शाम को जोधपुर से NCB की टीम पहुंची। इसके बाद यहां तस्करों से पूछताछ की गई।
40 करोड़ की एमडी तैयार होनी थी
पुलिस के अनुसार बाड़मेर में बॉर्डर के पास फैक्ट्री लगाने का सबसे बड़ा कारण था रोड कनेक्टिविटी। जहां फैक्ट्री लगाई गई वो एरिया भारतमाला हाईवे के नजदीक है। मुंबई से यहां मशीनें-केमिकल लाना भी आसान है।
इसलिए इस सुनसान ढाणी का सिलेक्शन किया गया। आरोपियों ने करीब एक महीने में पूरी फैक्ट्री तैयारी। घर के पास पशुओं के बाड़े में मशीनें सेटअप की गईं।
जहां फैक्ट्री स्थापित की, वहां ढाणियों के 4 मकानों के सिवा 3 किमी के दायरे में कोई मकान नहीं है। मशीनों को चलाने के लिए बिजली विभाग से 3 फेज का कनेक्शन भी लिया था। उनका प्लान 40 करोड़ कीमत की 20 किलो एमडी ड्रग्स बनाने का था।





