राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव को लेकर युवाओं का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को राजस्थान यूनिवर्सिटी में दो दर्जन से ज्यादा छात्र नेताओं ने युवाओं के साथ संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान जैसे ही प्रदर्शनकारी रैली निकाल जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर पहुंचने की कोशिश करने लगे। मौके पर तैनात पुलिस के जवानों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

छात्र नेता कमल चौधरी ने कहा कि राजस्थान की भजनलाल सरकार युवाओं पर तानाशाही कर रही है। राजस्थान में बेवजह पिछले तीन साल से छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी गई है। जबकि राजस्थान में छात्र संघ चुनाव के माध्यम से दर्जनों नेता मुख्य धारा की राजनीति तक पहुंचे हैं। जो आज देश की संसद से लेकर विधानसभा में आम जनता की समस्याओं के लिए लड़ रहे हैं। आज हम भी फिर से चुनाव बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन अगर अब भी सरकार ने हमारी मांग पूरी नहीं की तो हम उग्र आंदोलन करेंगे, जिसके लिए बीजेपी सरकार जिम्मेदार होगी।
छात्र नेता महेश चौधरी ने कहा- आज हम शांतिप्रिय तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने हम पर बेवजह लाठीचार्ज का प्रयास किया। हमें घसीटते हुए पुलिस के वाहनों में डाला गया। जबकि हमने कोई जुर्म नहीं किया था। हम तो बस अपनी वाजिब मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में अगर सरकार का यही रवैया बरकरार रहेगा। तो आने वाले दिनों में प्रदेशभर के युवा इस गूंगी बहरी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर बड़ा आंदोलन करेंगे।

बता दें कि प्रदेश में पिछले 3 साल से स्थगित हुए छात्रसंघ चुनाव को फिर से बहाल करने की मांग को लेकर राजस्थान यूनिवर्सिटी में पिछले एक महीने से लगातार छात्र नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे पहले छात्र नेता शुभम रेवाड़ ने पूर्व छात्र संघ पदाधिकारी के कट आउट के साथ यूनिवर्सिटी में रैली निकाल प्रदर्शन किया था। वहीं, NSUI ने लोकतंत्र की विदाई निकाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बारात निकली थी।
इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अंतिम यात्रा निकाल फिर से छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग की थी। वहीं देव पलसानिया ने छात्रसंघ कार्ययालय का ताला थोड़ सरकार से फिर छात्र हित में चुनाव कराने की मांग की थी। लेकिन अब तक सरकार की ओर से चुनाव को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। जिसकी वजह से लगातार छात्रों का विरोध बढ़ता जा रहा है।





