राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को रोकने पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इसे आपराधिक लापरवाही करार देते हुए तीखी नाराज़गी व्यक्त की। गहलोत ने जिला अस्पताल, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, महामंदिर क्षेत्र की सीएचसी सहित कई विकास कार्यों को अटकाए जाने पर कड़ा विरोध जताया।
सोमवार को जोधपुर के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि उनके द्वारा मंडोर, डिगाड़ी, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, प्रताप नगर में निर्मित जिलां अस्पतालों और नव चौकिया के सैटेलाइट अस्पताल बनवाए गए थे जिनका काम ठप्प है । अशोक गहलोत ने कहा, “मैंने आज शहर का दौरा किया। कांग्रेस सरकार ने मेडिकल यूनिवर्सिटी का काम शुरू किया, मंडोर, डिगाड़ी, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड और प्रताप नगर में अस्पताल बनवाए, नव चौकिया में सैटेलाइट हॉस्पिटल बनवाया पर आज हर तरफ काम रुका पड़ा है। लोग परेशान हैं, हालात बयान कर रहे हैं।” उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया, “जहाँ 12 डॉक्टर होने चाहिए थे, वहाँ सिर्फ दो डॉक्टर हैं।”
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा करोड़ों- अरबों रुपए खर्च करके प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए थे जिनका लाभ आमजन को नहीं मिल रहा है , “करोड़ों-अरबों रुपए खर्च किए और वर्तमान सरकार के समय उनको बर्बाद कर रहे हैं और पब्लिक को लाभ नहीं मिल रहा है। काम पूरा भी हो गया है लेकिन न उनका उद्घाटन हो रहा है और न उनको चालू कर रहे हैं। अस्पतालों के अंदर इक्विपमेंट नहीं आ रहे।”
अपने स्वयं के वार्ड की सीएचसी को ठप्प करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी
अपने खुद के वार्ड में शुरू की गई सीएचसी का कार्य ठप्प करने पर श्री गहलोत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सीएचसी है महामंदिर की, मेरे खुद के अपने वार्ड के अंदर, जहां मेरा अपना बर्थप्लेस है। वहाँ मैंने सीएचसी बनवाई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कल मैं उस एरिया में गया, तो मैंने खुद अपनी आँखों से वहाँ की स्थिति देखी।”
एलिवेटेड रोड का काम आगे नहीं बढ़ रहा
अशोक गहलोत ने जोधपुर की लंबे समय से अटकी पड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना पर भी सरकार को कठोर शब्दों में घेरा। उन्होंने बताया कि “महामंदिर से अखलिया चौराहे तक की एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव मैंने वर्ष 2019–20 में बजट में घोषित किया था। ट्रैफिक बढ़ने के कारण यह परियोजना शहर की सबसे आवश्यक जरूरतों में से एक है।” उन्होंने कहा कि उनके आग्रह पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग योजना में शामिल करने के लिए डीपीआर तैयार करने के आदेश दिए थे। डीपीआर तैयार हो चुकी है, टेंडर भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। इस घोर लापरवाही को लेकर उन्होंने कहा कि “अब यह परियोजना और डिले हो गई तो इसकी लागत और बढ़ जाएगी ”
हमारा कोटा का रिवर फ्रंट गुजरात मॉडल की धज्जियाँ उड़ा सकता है
वहीं अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के विज़न और कामकाज का उदाहरण देते हुए कोटा के रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “कोटा में ऐसा रिवरफ्रंट बना है, जैसा पूरे हिंदुस्तान में कहीं नहीं है। जिसे गुजरात में रिवरफ्रंट कहा जाता है, वह तो केवल नाममात्र का है। मोदी जी ने उसे गुजरात मॉडल का प्रतीक बताकर खूब प्रचारित किया, एल.के. आडवाणी साहब ने भी देशभर में उसकी तारीफ की , पर हमारा कोटा का रिवर फ्रंट,उनके मॉडल की धज्जियां उड़ा सकता है।”
अशोक गहलोत ने जयपुर में कंस्टीटूशन क्लब, महात्मा गांधी गवर्नेंस एंड सोशल साइंस मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट तथा गांधी म्यूज़ियम के उचित उपयोग न होने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इस प्रेस वार्ता में उन्होंने एसआई भर्ती को लेकर कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो इस पर बोलना फ़िलहाल उचित नहीं है वहीं जिला अध्यक्ष, एसआईआर संबंधी विषयों पर भी खुल कर अपनी राय व्यक्त की।






