जयपुर(सुनील शर्मा) भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार के शासन में पिछले 5 सालों में प्रदेश का औद्योगिक विकास ठप हो गया है और यहां पर अधिकारियों तथा मंत्रियों की कमीशनखोरी के कारण बड़े उद्योगपतियों को राजस्थान से मोह भंग हो रहा है।इसका कारण है कि राज्य सरकार ने इन्वेस्ट समिट के नाम पर करोडों रूपए फूंकने के बाद भी राजस्थान में निवेश नहीं ला पाई है। वहीं इस समिट के नाम पर उद्योग विभाग के अधिकारियों और मंत्रियों ने जमकर देश—विदेश में पर्यटन का लाभ उठाया है।भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि आंकड़ों के अनुसार राजस्थान सरकार ने इन्वेस्ट राजस्थान समिट के तहत 30 जनवरी 2023 तक 4195 एम.ओ.यू,एल.ओ.आई करार किये। इसमें से अब तक 100 करोड़ रूपये से अधिक के 91 एम.ओ.यू, एल.ओ.आई भी क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में है।सरकार के इस हाल को देखकर बताया जा सकता है कि राजस्थान में निवेश की क्या स्थिति रही है।प्रदेश में महंगी बिजली तथा पैट्रोल और डीजल पर ज्यादा डीजल के कारण उद्योगों को यहां कोई सहुलियत नहीं मिल पा रही है।ऐसे में अब यहां स्थापित उद्योग भी पडौसी राज्य गुजरात या हरियाणा में जमीन तलाश कर रहे है।भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि यहीं हाल राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों का भी है।प्रदेश में वर्ष जनवरी, 2019 से दिसम्बर 2022 तक 62 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किये गये है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार नहीं किए जाने और उद्योगों को लगाने में आ रही परेशानियों के कारण नये स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों में से आवंटन के लिए खोले गये 47 औद्योगिक क्षेत्रों में 1349 भूखण्डों का आवंटन हुआ है जबकि अभी भी 9111 भूखण्ड आवंटी का इंतजार कर रहे है।हालात यह है कि राज्य सरकार को औद्योगिक क्षेत्र में भूखंड आवंटन के लिए भी आवंटी नहीं मिल रहे है।
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि इसके अलावा पिछले दिनों बिजली संकट के कारण शुरू हुई बिजली कटौती भी अब तक बंद नहीं हो रही है।इसके कारण उद्योगों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।इसको देखते हुए उद्योग अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रहे है। प्रदेश में उद्योग धंधे बंद होने या पूरी क्षमता से कार्य नहीं किए जाने के कारण दिनों दिन इनमें श्रमिकों की कटौती की जा रही है।हाल यह है कि राज्य सरकार ने पिछले पांच साल के शासन में नए रोजगार के अवसर तो सृजित नहीं किए लेकिन उद्योगों को बंद कर जो रोजगार मिल रहा था उसे भी छीन लिया है।





