नागौर में सियासी रसूख वाले मिर्धा परिवार में 150 गज जमीन को लेकर विवाद हो गया है। जोधपुर के सूंथला स्थित ‘मिर्धा फार्म’ पर ‘समाधि स्थल’ को लेकर पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा आमने-सामने हो गए हैं। यह लड़ाई अब सोशल मीडिया तक पहुंच गई है।
15 जनवरी की रात मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखा। 16 जनवरी की दोपहर ज्योति मिर्धा ने भी पलटवार करते हुए इसे जमीन कब्जाने की साजिश करार दिया।

मनीष मिर्धा ने कहा- पिता की समाधि बनाने से रोका जा रहा मनीष मिर्धा ने सोशल मीडिया पर लिखा- मैंने अपने पिता की समाधि का निर्माण कार्य पारिवारिक समाधि स्थल पर शुरू करवाया था। वहां मेरी परदादी गोगी देवी (1982), मेरे बड़े भाई रवि मिर्धा (1987) और दादा नाथूराम मिर्धा (1996) की समाधि है। उनके बगल में ही पिताजी की समाधि बनवा रहा था। पुलिस ने आकर काम रुकवा दिया, क्योंकि ज्योति मिर्धा ने इसे अपनी निजी संपत्ति बताया।
मनीष ने दावा किया कि 2004 के बंटवारे के वक्त यह तय हुआ था कि समाधि स्थल दोनों परिवारों का सांझा रहेगा। इसके बदले दोगुनी जमीन देने की पेशकश की थी, लेकिन तब ज्योति मिर्धा और उनकी मां वीणा मिर्धा ने यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वे इतने ‘गए-बीते’ नहीं हैं कि समाधि के बदले जमीन लेंगे।
ज्योति मिर्धा ने कहा- हिंदू संस्कारों में जहां अंतिम संस्कार होता है, समाधि भी वहीं बनती
मनीष के आरोपों के बाद विदेश में मौजूद ज्योति मिर्धा ने शुक्रवार को ‘X’ और फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखकर जवाब दिया। ज्योति मिर्धा ने लिखा- 2004 में बंटवारे के समय, जब दादा जी के समाधि-स्थल को अलग रखने का प्रस्ताव रखा गया, तब दोनों पिता-पुत्र (स्व. भानु प्रकाश और मनीष) ने स्पष्ट मना करते हुए इसे हम दोनों बहनों के हिस्से में ही रखवाया था।
ज्योति ने तर्क दिया कि भानु प्रकाश का अंतिम संस्कार उन्होंने (मनीष ने) अपने हिस्से की जमीन में किया, लेकिन अब समाधि उनकी (ज्योति मिर्धा) खातेदारी जमीन में बनाना चाहते हैं। हिंदू संस्कारों में जहां अंतिम संस्कार होता है, समाधि भी वहीं बनती है।
ज्योति ने इसे राजनीति चमकाने का प्रयास बताते हुए कहा कि जब उनकी दादी का निधन हुआ था, तब मनीष का कोई ‘इंटरेस्ट’ नहीं था, लेकिन अब इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।

विवाद की जड़ में 150 गज का ‘समाधि स्थल’ इस पूरे विवाद का केंद्र फॉर्म हाउस के अंदर बना 150 वर्ग गज का समाधि स्थल है। मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस बेशकीमती जमीन को बेचना चाहती हैं, लेकिन बीच में आ रहा पैतृक समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है।
मनीष का आरोप है कि ज्योति मिर्धा इस समाधि स्थल को हटाना चाहती हैं, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां पर सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि बनाई गई थी। 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की समाधि बनी। नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद 1996 में उनकी भी समाधि यहीं बनी।
अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा का समाधि स्थल यहीं बना रहे हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है। शिकायत पक्ष का कहना है कि मनीष ने गुंडा तत्वों के साथ मिलकर मालिकाना हक वाली जमीन हड़पने की नीयत से हमला किया है।
क्या है पुलिस केस?
गौरतलब है कि 14 जनवरी को ज्योति मिर्धा के केयरटेकर प्रेम प्रकाश ने मनीष मिर्धा के खिलाफ प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि मनीष ने 10-12 साथियों के साथ फार्म हाउस में घुसकर चौकीदार को धमकाया, चाबियां छीनीं और समाधि स्थल में तोड़फोड़ की।
फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं। मनीष इसे एक बेटे का फर्ज बता रहे हैं। वहीं, ज्योति इसे कानून और मालिकाना हक का उल्लंघन बता रही हैं।






