ये तस्वीर है चित्तौड़गढ़ के हंसते-खेलते परिवार की। एक्सीडेंट में पूरा परिवार उजड़ गया। मां-बाप को खोने के बाद 6 साल का बेटा सदमे में है। 15 साल की बेटी घर के बरामदे में सुन्न बैठी है। इकलौते बेटे और बहू की मौत के बाद बुजुर्ग माता-पिता भी संभलने की हालत में नहीं हैं।
बेटी निष्ठा ने कहा- मम्मी-पापा मकर संक्रांति की सुबह उदयपुर गए थे। मेरे 10वीं बोर्ड के एग्जाम नजदीक थे, इसलिए मैं साथ नहीं गई थी। घर पर परदादी थीं, उन्हें संभालने के लिए कोई चाहिए था, इसलिए दादा-दादी भी घर पर ही रुक गए।
शादी समारोह में शामिल होने के बाद गुरुवार (15 जनवरी) रात को ही घर के लिए निकल गए थे, क्योंकि अगले दिन भाई का स्कूल था। आखिरी बार रात 11:30 बजे मम्मी ने पापा के फोन से कॉल आया था। कहा था कि हम 12 या 12:30 बजे तक निकल जाएंगे। इसके बाद सब सो गए। ढाई घंटे बाद हादसा हो गया। किसी ने फोन कर बताया था।


सड़क पर अचानक जानवर आने से हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, चित्तौड़गढ़ के मधुबन इलाके के रहने वाले रिंकेश नानवानी (40) पत्नी सुहानी (38), बेटा वैभव (6), चाची रजनी (58) निवासी प्रतापनगर (चित्तौड़गढ़) और फूफा हीरानंद लालवानी (60) निवासी इंदौर (MP) के साथ उदयपुर में शादी समारोह से वापस लौट रहे थे। गुरुवार रात 2 बजे भादसोड़ा थाना क्षेत्र में सड़क पर अचानक आए जानवर को बचाने के चक्कर में कार बेकाबू हो गई। डिवाइडर से टकराने बाद कार हाईवे के दूसरी तरफ सामने से आ रहे ट्रेलर से जा टकराई। कार के परखच्चे उड़ गए।

कार, ट्रेलर में बुरी तरह फंसी
भादसोड़ा थाना SHO महेंद्र सिंह ने बताया- हादसे के बाद कार सवार करीब दो घंटे तक कार में फंसे रहे। कार, ट्रेलर में बुरी तरह फंस गई थी। पुलिस ने क्रेन की मदद से कार को खींचकर बाहर निकाला गया। करीब 2 घंटे की मशक्कत के बाद कटर से कार के गेट काटकर शवों और घायलों को बाहर निकाला गया। आगे की सीट पर बैठे पति-पत्नी के सिर फट गए थे। दोनों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
पीछे बैठे चाची और फूफा गंभीर रूप से घायल थे। हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में दोनों ने दम तोड़ दिया। केवल 6 साल वैभव बचा है।

हादसे में बचा मासूम सदमे में, इंजेक्शन लगाकर सुलाया
हादसे में बचा 6 साल का वैभव इतना डर गया कि न तो कुछ खा पा रहा था और न ही सो पा रहा था। वह लगातार रो रहा था।
डॉक्टरों ने बताया- बच्चे को शांत करना बेहद जरूरी था, इसलिए उसकी नींद स्थिर रखने के लिए इंजेक्शन दिया गया। इंजेक्शन के बाद ही वह सो पाया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है, लेकिन मन पर पड़ा यह सदमा उसे लंबे समय तक परेशान करेगा। वैभव को रात में यही बताया गया कि उसके मम्मी-पापा हॉस्पिटल में बेहोश हैं। उसे अब तक नहीं बताया गया है कि वे इस दुनिया में नहीं रहे।

घर में पसरा सन्नाटा, बेटी बरामदे में सुन्न होकर बैठी
रिंकेश नानवाली के घर पर मातम पसरा है। रिंकेश की मां सुनीता रोते-रोते बेसुध हो रही हैं। बरामदे में बैठी 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी निष्ठा की आंखें भी आंसुओं से भरी हैं।
निष्ठा ने बताया- रात करीब 2:45 बजे किसी रिश्तेदार का फोन आया कि एक्सीडेंट हो गया है, तुरंत हॉस्पिटल आ पहुंच जाओ।
बेटे का स्कूल था, रात में ही घर के लिए निकले
रिंकेश के पिता राजकुमार नानवानी ने बताया- हॉस्पिटल पहुंचने के बाद पता चला कि हमारी दुनिया ही खत्म हो गई। रिश्तेदारों ने रात में में घर जाने से रोका था। लेकिन सुबह बच्चों के स्कूल होने के कारण बहू सुहानी ने रात में ही घर लौटना ठीक समझा। किसी को क्या पता था कि यही सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
राजकुमार ने बताया- उनका बेटा दिनभर साथ दुकान पर बैठते थे और साथ ही घर लौटते थे। उनके घुटनों में दर्द रहता है, इसलिए वे शादी में नहीं गए थे। वहीं बड़ी बेटी निष्ठा के बोर्ड एग्जाम नजदीक होने के कारण वह भी घर पर ही रुकी थी।
‘मेरा इकलौता बेटा था… सब उजड़ गया… मेरा परिवार खत्म हो गया।’

कैंसर पीड़ित रजनी के पति सदमे में
इस हादसे में जान गंवाने वाली रजनी के पति मनोज नानवानी भी गहरे सदमे में हैं। वे मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं और ठीक से खा-पी भी नहीं पाते। इसी कारण वे शादी में नहीं गए थे और बेटे भावेश के साथ घर पर ही रुके थे।
मनोज ने बताया-रजनी ही उनका पूरा ध्यान रखती थीं। उन्हें क्या पता था कि वह अब कभी लौटकर नहीं आएंगी। एक पल में उनका सहारा भी उनसे छिन गया। यह हादसा जिंदगी भर का दर्द बन गया है।

आखिरी समय में नहीं खुला एयरबैग
रिंकेश की खुद की गाड़ी खराब हो गई थी, इसलिए वह अपनी चाची की कार से उदयपुर गए थे। कार काफी पुराना मॉडल होने के कारण उसका एयरबैग नहीं खुला। अगर एयरबैग खुलता, तो शायद जान बच सकती थी।
चार जिंदगियां एक झटके में चली गईं। एक मासूम हमेशा के लिए इस हादसे के जख्म लेकर जीने को मजबूर हो गया और पीछे रह गए बुजुर्ग माता-पिता, जो अपने इकलौते बेटे की तस्वीरें सीने से लगाकर रो रहे हैं। इधर, रिंकेश का व्यवहार इतना अच्छा था कि उसके निधन की खबर फैलते ही इलाके के व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद रखीं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।







