जयपुर आराध्य श्री गोविंददेवजी का शुक्रवार को पाटोत्सव मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी के अवसर पर सुबह से ही श्री मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। मंदिर परिसर में कीर्तन, मंगल गीत और बधाई गान के साथ उत्सव का माहौल है। बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे हैं।
ठाकुर श्रीजी का आज प्राकट्य उत्सव विशेष अभिषेक किया गया। भगवान को बसंत पंचमी के अवसर पर विशेष भव्य पीली पोशाक और अलंकारों से श्रृंगार किया गया है।

बसंत पंचमी पर माना जाता है ठाकुर श्रीजी का पुनः प्राकट्य बसंत पंचमी को ठाकुर श्री गोविंददेवजी महाराज के पुनः प्राकट्य की तिथि माना जाता है। भक्तिरत्न कर ग्रंथ के अनुसार माघ सुदी पंचमी संवत 1582 यानी 1525 ईस्वी में श्रीधाम वृंदावन के गोमाटीला योगपीठ से ठाकुर श्रीजी का पुनः प्राकट्य हुआ था। यह प्राकट्य श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य और षड् गोस्वामियों में प्रमुख श्रील रूप गोस्वामी के माध्यम से हुआ था। तभी से इस तिथि पर पाटोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। ब्रह्ममुहूर्त में की गई मंगला आरती, पंचामृत अभिषेक बसंत पंचमी की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कीर्तनियों और परिकर जनों ने मंगल गीतों के साथ दिन की शुरुआत की। सुबह 4 बजे मंगला आरती हुई, जिसके दर्शन 4 से 4:15 बजे तक कराए गए। इसके बाद सुबह 5 से 5:15 बजे तक ठाकुर श्रीजी के पाटोत्सव अभिषेक के दर्शन हुए। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत से अभिषेक किया गया।

पीली पोशाक में हुआ श्रृंगार, अलग-अलग झांकियों में लगे भोग अभिषेक के बाद ठाकुर श्रीजी को मावा पेड़े का भोग अर्पित किया गया और महाआरती हुई। इस मौके पर ठाकुर श्रीजी को बसंत पंचमी की परंपरा अनुसार विशेष भव्य पीली पोशाक और अलंकारों से श्रृंगार कराया गया। धूप झांकी के दर्शन सुबह 8:30 से 9:45 बजे तक हुए, जिसमें पहले अधिवास पूजन और फिर धूप आरती की गई। धूप झांकी में बेसन के लड्डू का भोग लगाया गया। राजभोग झांकी में गुलाल और पुष्प माला अर्पित श्रृंगार झांकी के दर्शन सुबह 10:15 से 10:45 बजे। इसके बाद सुबह 11:15 बजे राजभोग झांकी के दर्शन खोले जाएंगे। बसंतोत्सव की परंपरा के अनुसार ठाकुर श्रीजी को पांच प्रकार का गुलाल, इत्र और पुष्प माला अर्पित की जाएगी। इस दौरान चंवर सेवा होगी। इसके बाद राजभोग आरती की जाएगी। राजभोग झांकी के दर्शन 11:45 बजे तक खुले रहेंगे।





