मेडिकल एज्युकेशन डिपार्टमेंट का एक बड़ा ही अजीब वाकया सामने आया है। डिपार्टमेंट ने जिन हॉस्पिटलों के अधीक्षकों या प्रभारियों (डॉक्टर्स) को उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया, उन्हें अगले ही दिन खराब काम के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए। यही नहीं डिपार्टमेंट ने एक प्राइवेट सेक्टर के व्यक्ति को भी सम्मानित कर दिया।
26 जनवरी को जिनको सम्मानित किया गया उनमें से एक डॉक्टर के खिलाफ तो वित्तीय अनियमितता का मामला भी विभाग में लंबित चल रहा है।
दरअसल, मेडिकल एज्युकेशन डिपार्टमेंट ने 26 जनवरी को हॉस्पिटल में अच्छा काम करने पर जयपुर के सैटेलाइट हॉस्पिटल बनीपार्क के अधीक्षक डॉ. पीडी मीणा, एस.आर गोयल राजकीय हॉस्पिटल, सेठी कॉलोनी जयपुर के अधीक्षक डॉ. गोवर्धन मीणा, राज बहादुर मेमोरियल हॉस्पिटल, भरतपुर के अधीक्षक डॉ. नगेन्द्र भदौरिया और अजमेर स्थित महिला चिकित्सालय की अधीक्षक डॉ. पूर्णिमा पचौरी को सम्मानित किया था। ये सम्मान डिपार्टमेंट के कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने दिया।
27 जनवरी को दिए कारण बताओ नोटिस
लेकिन उसके अगले ही दिन यानी 27 जनवरी को कमिश्नर नरेश कुमार ने इन तीनों हॉस्पिटल अधीक्षकों यानी डॉक्टरों को काम में गंभीर लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। ये नोटिस मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA) के तहत भर्ती हुए मरीजों के इलाज की एवज में उठाए जाने वाले क्लेम के रिजेक्ट होने के संबंध में था।
डिपार्टमेंट ने माना कि हॉस्पिटल प्रशासन और अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये क्लेम बीमा कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया, जिससे हॉस्पिटल और सरकार दोनों को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।
प्राइवेट सेक्टर के व्यक्ति का भी कर दिया सम्मान
मेडिकल एज्युकेशन डिपार्टमेंट में डॉक्टर्स के सम्मान का ही नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर के एक व्यक्ति के सम्मान की भी चर्चा है। 26 जनवरी के दिन डिपार्टमेंट ने आर्किटेक्ट डॉ. अनूप बरतिया को भी सम्मानित कर दिया।
बरतिया एक प्राइवेट आर्किटेक्ट हैं, जिन्होंने आईपीडी टॉवर और अन्य दूसरे हॉस्पिटलों की डिजाइन तैयार की है। डिपार्टमेंट में चर्चा है कि क्या विभाग में कर्मचारी-अधिकारी कम पड़ गए थे, जो एक प्राइवेट सेक्टर के अधिकारी को राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया गया।

इन हॉस्पिटल को नोटिस
मेडिकल एज्युकेशन कमिश्नर नरेश गोयल ने एस.आर गोयल राजकीय हॉस्पिटल, सेठी कॉलोनी जयपुर के अधीक्षक को नोटिस जारी किया। इस हॉस्पिटल में MAA योजना के तहत एक जून से 30 नवंबर 2025 तक 13.64 लाख रुपए के क्लेम जनरेट किए गए। जिसमें से 6.61 लाख रुपए के क्लेम ही कंपनी ने पास किए, जबकि शेष 5.58 लाख रुपए (38.35 फीसदी) क्लेम रिजेक्ट हो गए।
- राजकीय महिला चिकित्सालय, अजमेर में इस अवधि के दौरान 5.91 करोड़ रुपए के क्लेम जनरेट किए गए। जिसमें से 3.14 करोड़ रुपए के क्लेम ही कंपनी ने पास किए, जबकि शेष 1.70 करोड़ रुपए (29.88 फीसदी) क्लेम रिजेक्ट हो गए।
- सैटेलाइट हॉस्पिटल, बनीपार्क जयपुर में एक जून से 30 नवंबर 2025 तक 13.33 लाख रुपए के क्लेम जनरेट किए गए। जिसमें से 9.49 लाख रुपए के क्लेम ही कंपनी ने पास किए, जबकि शेष 3.44 लाख रुपए (28.25 फीसदी) क्लेम रिजेक्ट हो गए।
- राज बहादुर मेमोरियल हॉस्पिटल, भरतपुर में इस अवधि के दौरान 6.19 करोड़ रुपए के क्लेम जनरेट किए गए। जिसमें से 4.13 करोड़ रुपए के क्लेम ही कंपनी ने पास किए, जबकि शेष 1.22 करोड़ रुपए (21.99 फीसदी) क्लेम रिजेक्ट हो गए। सूत्रों का कहना है कि हॉस्पिटल अधीक्षक के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मामला भी लंबित है।
नोटिस देना केवल अधिकारी को जगाना है
मेडिकल एज्युकेशन कमिश्नर नरेश गोयल ने कहा कि अधिकारी एक ही नहीं बल्कि कई सेक्टर में अच्छा काम करते हैं, जिनके आधार पर उनको सम्मानित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि भरतपुर हॉस्पिटल अधीक्षक के खिलाफ क्या वित्तीय अनियमितता का मामला चल रहा है, वह मुझे एक बार देखना पड़ेगा, उसके बाद ही कुछ बता पाऊंगा।





