तेना गांव के पास नागाणा राय जूना देवल क्षेत्र में वन विभाग द्वारा तीन साल पहले लगाए गए वृक्षारोपण में आग लग गई। ग्रामीणों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से इस आग पर काबू पा लिया गया, जिससे हजारों पौधों को जलने से बचा लिया गया। इस घटना ने शेरगढ़ क्षेत्र में अग्निशमन सुविधाओं की कमी को फिर उजागर किया है।
यह घटना आम रास्ते की ओर से शुरू हुई। पौधों के रखवाले मग सिंह ने धुआं उठते देखा और तुरंत नरेगा मेट मांगी लाल को सूचना दी। इसके बाद यह जानकारी ग्राम पंचायत के ग्रुप में प्रसारित की गई, जिसके बाद बस स्टैंड क्षेत्र से युवा ग्रामीण वाहनों के साथ मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों ने तत्काल आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। पानी के टैंकर मंगवाए गए। टैंकर पहुंचने तक युवाओं ने आग को आगे बढ़ने से रोके रखा। बाद में पानी का छिड़काव कर आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो वन विभाग की तीन साल की मेहनत पलभर में राख हो सकती थी। यह वृक्षारोपण क्षेत्र अब पेड़ बनने की ओर अग्रसर था, लेकिन सूखी घास की अधिकता और क्षेत्र के दोनों ओर पक्की सड़कें (जोधपुर-शेरगढ़ मुख्य सड़क और आम रास्ता) आग लगने का प्रमुख कारण बन रही हैं।
घटना के दौरान गंगा सिंह, उगम सिंह, नरपत सिंह, देवाराम सुथार, समुद्र सिंह और पूरण सिंह सहित अन्य युवाओं ने शेरगढ़ क्षेत्र में अग्निशमन सुविधा के अभाव पर सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आग की घटनाओं के बावजूद स्थायी फायर फाइटिंग व्यवस्था का न होना गंभीर लापरवाही है।

सूचना मिलने पर वन विभाग शेरगढ़ से रेंजर गुणेशा राम और तख्त सिंह भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस घटना ने कई प्रशासनिक सवाल खड़े किए हैं, जैसे सड़क किनारे सूखी घास हटाने की नियमित व्यवस्था क्यों नहीं है, वन क्षेत्र के पास फायर लाइन/वॉच एंड वार्निंग सिस्टम कब बनेगा और शेरगढ़ में स्थायी अग्निशमन सुविधा की अनदेखी कब तक की जाएगी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सूखी घास की समय-समय पर कटाई, फायर लाइन का निर्माण और शेरगढ़ में अग्निशमन संसाधनों की तत्काल व्यवस्था की जाए।






