आने वाले समय में जोधपुर की आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में मंत्रों से इलाज संभव हो सकेगा इसको लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से अनिद्रा की समस्या पर रिसर्च भी किया गया। जिसके परिणाम सकारात्मक आए हैं। ऐसे में अब अन्य मरीजों पर भी इसे शुरू करने की कवायद है।
यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल ने बताया मंत्रों से इलाज का जिक्र प्राचीन संहिताओं में भी मिलता है। इसी को लेकर यहां एक शोध पीठ की स्थापना की गई है। यहां राजस्थान के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर शिव गौतम के साथ मिलकर मंत्रों के जरिए मानस रोगों के इलाज को लेकर काम शुरू किया जाएगा। इस काम में IIT का भी सहयोग लिया जाएगा।
शुक्ल ने बताया कि आयुर्वेद में मंत्र का विशेष महत्व है। मंत्र के साथ यहां ज्योतिष अनुष्ठान और अन्य विधाओं को भी काम लिया जाएगा। क्योंकि ध्वनि का एक बड़ा प्रभाव मन पर पड़ता है। इसे साउंड थेरेपी भी कहा जाता है। ऐसे में आर्युवेद की यूनिवर्सिटी में आने वाले समय में मरीजों का इलाज मंत्रों के जरिए किया जाएगा।

खासतौर पर मानसिक रोगों में ये कारगर साबित हो सकता है। क्योंकि हाल ही में यूनिवर्सिटी की ओर से 6 लोगों पर एक रिसर्च भी की गई है। जिसमें अनिद्रा पर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कई मरीज जिन्हें नींद नहीं आती थी उन पर ये रिसर्च की गई। ऐसे में अब आने वाले समय में अन्य रोगों के भी इलाज में इस तकनीक को काम में लिया जाएगा।।
यहां केवल दवाई और ओषधियां ही नहीं अन्य विधाएं जिनके जरिए मरीजों को जल्द स्वस्थ किया जा सकें उस पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए देशभर में मंत्र से इलाज करने वाले डॉक्टरों की कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी।
तीन प्रकार की चिकित्सा विधि
आयुर्वेदिक चिकित्सा में मुख्य रूप से तीन प्रकार की विधियां अपनाई जाती हैं। पहली युक्तिव्यपाश्रय चिकित्सा है, जो दवाओं, पंचकर्म और शल्य प्रक्रियाओं पर आधारित है। दूसरी दैवव्यपाश्रय चिकित्सा मंत्र जाप, उपवास, ध्वनि चिकित्सा, यज्ञ, दान तथा धूप जैसे 12 उपायों को समेटती है। तीसरी विधि सत्वावजय चिकित्सा मन को नियंत्रित कर रोगों का उपचार करती है, जैसे ध्यान और संयम पर जोर देकर। राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने दैवव्यपाश्रय में मंत्रों तथा उपवास को प्राथमिकता दी है।






