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राजस्थान में ‘नाथी का बाड़ा’ पर फिर सियासत:विधायक हरीश चौधरी बोले- ये परोपकार का प्रतीक, इसका निगेटिव इस्तेमाल गलत; सीएम ने डोटासरा पर किया था पलटवार

राजस्थान की सियासत में एक बार फिर नाथी का बाड़ा चर्चा में है। दरअसल, विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान सीएम भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर पलटवार करते हुए ‘नाथी का बाड़ा’ का जिक्र किया था। फिर क्या था, सोशल मीडिया पर भी ‘नाथी का बाड़ा’ छा गया और नेताओं के भी बयान आना शुरू हो गए।

‘नाथी का बाड़ा’ शब्द का निगेटिव इस्तेमाल गलत

कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी और विधायक हरीश चौधरी ने एक्स पर लिखा- ‘नाथी का बाड़ा’ शब्द राजस्थान के इतिहास में समर्पण और परोपकार का प्रतीक है। नाथी का बाड़ा जोधपुर के त्रिपोलिया बाजार में नाथी बाई नाम की महिला की ज़मीन थी, जिसमें बाड़ा बनाया हुआ था। जहां दूर-दराज से आने वाले जरुरतमंद जिन्हें रुकने का कोई स्थान नहीं मिलता था, वे बिना किसी शुल्क के रुक सकते थे। चौधरी ने इसका इस्तेमाल सियासी कटाक्ष के तौर पर करने को लेकर आपत्ति जताई है।

हरीश चौधरी ने आगे लिखा- गांवों और आस-पास के क्षेत्रों से लकड़ी, घी इत्यादि सामान शहर में देने आने वाले लोग इस जगह रुकते थे। आम आदमी के लिए हमेशा सुलभ और बिना शुल्क के उपलब्ध होने की वजह से यह जगह धीरे-धीरे सब जगह प्रसिद्ध हो गई।

सीएम ने कहा था- कांग्रेस के पूर्व मंत्री कौनसे बाड़े का रास्ता दिखाते थे, पहले घी पी लिया अब उपदेश दे रहे

सीएम भजनलाल शर्मा ने 5 फरवरी को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का जवाब देते हुए डोटासरा पर इशारों में पलटवार करते हुए कहा था कि हमारे कांग्रेस के एक साथी जब मंत्री थे, तो लोग परेशानी लेकर जाते थे, तो कौनसा बाड़ा था उसका रास्ता दिखा देते थे। इस पर बीजेपी विधायकों ने कहा था- नाथी का बाड़ा।

3 फरवरी को हमारे साथी ने उस बाड़े के बारे में इतिहास बता दिया था। कल तक जो लोग घी पीने में व्यस्त थे वे आज बोल रहे हैं भ्रष्टाचार है, युवा देश का भविष्य है। वाह, पहले घी पी लिया अब उपदेश दे रहे हैं। सत्ता हाथ में थी, मुंह में माखन था, सत्ता गई तो ज्ञान की मटकी भर गई।

डोटासरा ने 2021 में कहा था- नाथी का बाड़ा समझ रखा है क्या? तब से इस पर सियासत

नाथी का बाड़ा विवाद पिछली गहलोत सरकार के समय का 2021 का है। उस वक्त गोविंद सिंह डोटासरा शिक्षा मंत्री थे। डोटासरा को ज्ञापन देने के लिए उनके सीकर आवास पर कुछ शिक्षक गए थे। किसी बात पर डोटासरा नाराज हो गए थे।

उन्होंने शिक्षकों से कहा था- स्कूल टाइम में क्यों आए, नाथी का बाड़ा समझ रखा है क्या? इसके बाद इस पर खूब विवाद हुआ था। नाथी का बाड़ा सियासी जुमला बन गया और अब भी इसे लेकर सियासी वार पलटवार चलते रहते हैं। विधानसभा में सीएम ने इसी का जिक्र किया था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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