राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने रविवार को जेईसीसी सीतापुरा में आयोजित स्टोन मार्ट 2026 कार्यक्रम में राजस्थान के पत्थर को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक एवं वैश्विक धरोहर बताते हुए कहा कि राजस्थान का पत्थर निर्माण सामग्री के साथ समय, सभ्यता और स्थायित्व का मौन साक्ष्य है। अरावली पर्वतमाला से प्राप्त सैंडस्टोन, मार्बल, ग्रेनाइट और लाइमस्टोन ने भारत को विश्व में मजबूती और पहचान दी है। उन्होंने कहा कि भरतपुर का सैंडस्टोन, मकराना का मार्बल और जैसलमेर का पीला पत्थर वैश्विक स्तर पर राजस्थान की पहचान बनाए हुए हैं।
देवनानी ने कहा कि दिल्ली का लाल किला, संसद भवन तथा अनेक ऐतिहासिक इमारतें राजस्थान के पत्थरों की स्थायित्व क्षमता का प्रमाण हैं, वहीं विदेशों में भी राजस्थान का पत्थर सार्वजनिक भवनों और स्मारकों में सम्मान के साथ प्रयुक्त हुआ है।
विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अवसंरचना एवं धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में प्राकृतिक पत्थर को पुनः प्राथमिकता दिए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेंट्रल विस्टा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या धाम जैसे प्रोजेक्ट यह दर्शाते हैं कि भारत ने अस्थायी सामग्रियों के स्थान पर स्थायी पत्थर आधारित निर्माण की ओर निर्णायक कदम बढ़ाया है।
उन्होंने पत्थर उद्योग से जुड़े उद्यमियों से नवाचार, तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन को अपनाने का आह्वान किया। डिजिटल कटिंग, रोबोटिक फिनिशिंग, अल्ट्रा-थिन स्लैब और सस्टेनेबल स्टोन आर्किटेक्चर को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान केवल पत्थर का निर्यातक नहीं, बल्कि वैश्विक पत्थर नवाचार का केंद्र बन सकता है।
देवनानी ने कहा कि जो सभ्यताएँ पत्थर पर भरोसा करती हैं, वे समय पर भी भरोसा रखती हैं। राजस्थान का पत्थर न बोलकर भी यह संदेश देता है कि स्थायित्व ही विकास की सबसे सशक्त नींव है।






