गोल्ड लोन ट्रांसफर और लोन बढ़ाने के नाम पर कैप्री गोल्ड लोन कंपनी से 11.10 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। कंपनी ने दंपती के खिलाफ भगत की कोठी थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है। मामले की जांच एसआई गिरधारीलाल को सौंपी गई है।
कुड़ी भगतासनी निवासी कैप्री गोल्ड लोन कंपनी की ब्रांच मैनेजर दामिनी मिश्रा (30) ने बताया कि 29 जनवरी को कानावास का पाना स्थित सियालों की ढाणी निवासी रमेश (27) पुत्र ओमाराम ब्रांच में आया। उसने बताया कि उसका बजाज बैंक में पहले से गोल्ड लोन चल रहा है, जिसे वह कैप्री कंपनी में ट्रांसफर कराकर उसकी राशि बढ़वाना चाहता है। उसने इससे जुड़े दस्तावेज भी पेश किए। दस्तावेजों की जांच में उसके नाम से 11.10 लाख रुपए का गोल्ड लोन होने सामने आया गया। फिर नियम के मुताबिक यह रकम सीधे गोल्ड लोन खाते में जमा होनी थी, ताकि पुराने लोन का निपटारा हो सके। लेकिन रमेश ने बहाना बनाया कि उसके गोल्ड लोन खाते में सीधे रकम जमा नहीं हो पा रही है और पहले किसी अन्य खाते में पैसा डालना पड़ेगा। इस पर उसने मधुबन स्थित पंजाब नेशनल बैंक का खाता दिया और भरोसा दिलाया कि उसकी नेट बैंकिंग चालू है। वहीं से रकम बजाज के गोल्ड लोन खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
इधर, रिकवरी एजेंट ने छूट का झांसा दे 59 हजार ठगे
जोधपुर | लोन की पूरी राशि बैंक में जमा कराकर एनओसी दिलाने का झांसा देकर रिकवरी एजेंट की ओर से 59,940 रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित विजेश कुमार ने रिकवरी एजेंट देवाराम के खिलाफ विवेक विहार थाने में इस्तगासे के जरिए धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है। मामले की जांच हेड कांस्टेबल दौलाराम को सौंपी गई है।
विवेक विहार थानाधिकारी दिलीप खदाव के अनुसार पाली रोड स्थित भाकरासनी निवासी विजेश कुमार ने रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि उसकी चाची संगीता, मां मलूका, चाची देवी बाई और प|ी कौशल्या ने जाना स्मॉल फाइनेंस बैंक से सामूहिक लोन लिया था। सभी लोग हर महीने नियमित रूप से लोन की किस्तें जमा कर रहे थे, जिन्हें लेने के लिए बैंक का रिकवरी एजेंट देवाराम घर आता था।
रिपोर्ट के मुताबिक 13 जून को देवाराम घर आया और कहा कि यदि सभी लोग एकमुश्त रकम दे दें तो वह बैंक में लोन पूरा जमा करवा देगा और एनओसी भी दिलवा देगा। उसने यह भी कहा कि एक साथ भुगतान करने से उनका फायदा हो जाएगा। उसकी बातों में आकर परिवार ने यूपीआई के जरिए कुल 59,940 रुपए देवाराम को ट्रांसफर कर दिए।
फर्जी जीरो बैलेंस का स्टेटमेंट भेजा
इसके बाद देवाराम ने बताया कि उसने बैंक में पूरी रकम जमा करवा दी है। कुछ दिन बाद 10 जुलाई को उसने वॉट्सएप के जरिए तीन खातों की शून्य बैलेंस स्टेटमेंट भी भेज दी।
विजेश कुमार ने इसकी पुष्टि के लिए बैंक जाकर जानकारी ली तो सामने आया कि लोन खाते में 59,940 रुपए अब भी बकाया हैं और यह रकम बैंक में कभी जमा ही नहीं हुई। जब देवाराम से संपर्क किया गया तो उसने कुछ दिन में एनओसी देने का आश्वासन दिया, लेकिन न तो लोन खाते में रकम जमा करवाई और न ही एनओसी दी। इस बारे में बैंक मैनेजर को भी अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि देवाराम ने भरोसे में लेकर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और धोखाधड़ी की।
इसी भरोसे में आकर कैप्री के ब्रांच मैनेजर ने स्टाफ सदस्य श्रवण और पंकज जांगिड़ को 11.10 लाख रुपए नकद देकर रमेश के साथ पीएनबी शाखा भेजा, जहां यह रकम उसके खाते में जमा कर दी गई। इसके बाद रमेश ने कहा कि नेट बैंकिंग के जरिए ट्रांसफर नहीं हो रहा है। फिर उसने दावा किया कि वह अपने कोटक महेंद्रा बैंक खाते से रकम ट्रांसफर कर देगा। वहां जाकर उसने जानबूझकर बार-बार गलत पासवर्ड डालकर ट्रांजेक्शन फेल कर दिया। जब उससे नकद रकम निकालने को कहा गया तो उसने कोटक बैंक का बहाना बनाते हुए कैप्री शाखा से लिखित पत्र लाने की बात कही। मजबूरी में कंपनी की ओर से लेटरपैड पर कोटक महेंद्रा बैंक को पत्र भी दिया गया, लेकिन वहां कैश उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर रकम नहीं दी गई।
आरोपी ने प|ी के खाते में 5 लाख रुपए डाले, फिर फरार हो गया
कैप्री से पीएनबी में डलवाया पैसा, ट्रांसफर न बता कोटक में डाल दिए
इसी दौरान रात में रमेश ने 11.10 लाख रुपए में से 5 लाख रुपए अपनी प|ी रीना खिलेरी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। शेष रकम को लेकर न तो कोटक महेंद्रा बैंक कोई स्पष्ट जानकारी दे रहा है और न ही लेन-देन की स्थिति साफ हो पा रही है। इसके बाद रमेश ने मोबाइल बंद कर लिया और प|ी के साथ घर से फरार हो गया।






