संभागीय आयुक्त भरतपुर एवं प्रभारी सचिव डीग नलिनी कठोतिया ने सोमवार को डीग जिले के तालफरा में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर का औचक निरीक्षण किया। राज्य सरकार की प्राथमिकता के अनुरूप ‘सरकार आपके द्वार’ की मंशा को साकार करने के उद्देश्य से चल रहे इन शिविरों की प्रगति समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसमस्याओं का केवल कागजी निस्तारण न हो, बल्कि धरातल पर आमजन को राहत महसूस होनी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने अब तक की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि जिले में अब तक 60 शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 38,028 से ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शिविर में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुँचाना है।
विभागीय समीक्षा के दौरान कृषि एवं पशुपालन विभाग की प्रगति रिपोर्ट पर विशेष चर्चा की गई। यह अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अब तक 15,245 किसानों को जानकारी प्रदान की गई है, जबकि पशुपालन विभाग द्वारा संचालित मंगला पशु बीमा योजना के तहत 3,088 पशुपालकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा चुका है। पशुधन के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए शिविरों के माध्यम से अब तक 12,259 पशुओं का उपचार एवं औषधि वितरण किया गया है। संभागीय आयुक्त ने कृषि विभाग को तारबंदी और पाइप लाइन के प्रकरणों में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए, जहाँ अब तक क्रमशः 228 और 197 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

राजस्व एवं पंचायती राज विभाग के कार्यों का निरीक्षण करते हुए प्रभारी सचिव ने पट्टा वितरण और राजस्व रिकॉर्ड में शुद्धिकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत तैयार किए गए 711 कार्डों का वितरण अविलंब पात्र व्यक्तियों को किया जाए। साथ ही, राजस्व विभाग को प्राप्त हुए खाता विभाजन के 21 प्रकरणों और फार्मर रजिस्ट्री के 548 मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए पाबंद किया गया।
विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभारी सचिव ने विद्युत विभाग के अधिकारियों से ढीले तारों और झूलती लाइनों के संबंध में की गई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा। उन्होंने पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक हुए 1,543 पंजीकरणों की समीक्षा की और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में इसे और व्यापक बनाने को कहा। निरीक्षण के अंत में संभागीय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि शिविरों में प्राप्त परिवेदनाओं के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता क्षम्य नहीं होगी।






