राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री गिरफ्तार,900 करोड़ के घोटाले में एसीबी का बड़ा एक्शन
न्यूज इन राजस्थान सुनील शर्मा
जयपुर। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रहे डॉ.महेश जोशी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले साल वे प्रवर्तन निदेशालय के जाल में फंसे थे और अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन पर शिकंजा कसा है। एसीबी ने 900 करोड़ रुपए के जल जीवन मिशन घोटाले में डॉ. महेश जोशी को गिरफ्तार किया है। गुरुवार 7 मई की सुबह 5 बजे एसीबी की टीम ने डॉ. जोशी को उनके घर से हिरासत में लिया। फिर एसीबी दफ्तर ले जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया।
*पहले भी जा चुके हैं जेल*
पूर्व मंत्री डॉ. महेश जोशी को अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय ने जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उनकी पत्नी की तबियत खराब थी और फिर उनका निधन भी हो गया। पत्नी के निधन के दौरान उन्हें 4 दिन की अंतरिम जमानत मिली और वे जेल से बाहर आए थे लेकिन बाद में फिर उन्हें जेल भेजा गया था। करीब 7 महीने जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली थी। दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से डॉ. जोशी को जमानत मिली जिसके बाद वे जेल से बाहर आए थे। अब चार महीने बाद एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार किया है।
*सुबोध अग्रवाल के बाद डॉ. जोशी तक पहुंची एसीबी*
जल जीवन मिशन घोटाले में पिछले महीने एसीबी ने रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। पांच दिन की पुलिस रिमांड के बाद सुबोध अग्रवाल को जयपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। फिलहाल सुबोध अग्रवाल जयपुर की सेंट्रल जेल में बंद है। इससे पहले एसीबी ने जलदाय विभाग के अधिकारियों और दलालों सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। वे सभी फिलहाल जेल में बंद हैं। अब एसीबी ने पूर्व मंत्री डॉ. महेश जोशी पर हाथ डाला है। अब डॉ. जोशी एक बार फिर जेल जाने वाले हैं।
*क्या है मामला?*
यह मामला जल जीवन मिशन के तहत जारी किए गए टेंडरों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है. ये मिशन केंद्र सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य हर घर नल पहुंचाना है. इस मामले में जोशी समेत अन्य पर चहेती कंपनी को टेंडर देने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है. जांचकर्ताओं का आरोप है कि श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल नामक कंपनियों ने IRCON इंटरनेशनल द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए जाली अनुभव प्रमाण पत्र जमा करके टेंडर हासिल किया था. इस मिशन में 9O0 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का आरोप है, जिसमें श्री गणपति ट्यूबवेल पर फर्जी तरीके सेर 859.2 करोड़ रुपये को ठेका और श्याम ट्यूबवेल पर 120.25 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल किया था.
*22 लोगों के खिलाफ दर्ज है FIR*
इस मामले में पूर्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया गया है. घोटाले में अब तक 10 गिरफ्तारी की जा चुकी है, जबकि वित्तीय सलाहकारों, मुख्य इंजीनियरों और अधीक्षण इंजीनियरों सहित 22 अधिकारियों के खिलाफ साल 2024 में एसीबी ने एफआईआर दर्ज की थी. आरोपियों की सूची में जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता राम करण मीणा, दिनेश गोयल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा, परितोष गुप्ता, अधीक्षण अभियंता निरेल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू, जितेंद्र शर्मा और अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना सहित अन्य लोग शामिल हैं. फिलहाल, तीन आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं. जिन्हें भगौड़ा घोषित कर दिया गया है. एसीबी ने उनकी संपत्ति की जानकारी जुटाकर कोर्ट में पेश की है. अब उनकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी.
Author: newsinrajasthan
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