दौसा के मेहंदीपुर बालाजी कस्बे में मिले एक ही परिवार के चार शवों की गुत्थी अभी सुलझ नहीं पाई है। मृतकों में पति-पत्नी और उनके जवान बेटा-बेटी शामिल हैं। यह परिवार देहरादून (उत्तराखंड) से बालाजी के दर्शन के लिए आया था। परिवार अपनी बेटी का रिश्ता टूटने से परेशान था। शादी के एक महीने बाद ही बेटी-दामाद में विवाद हुआ था। बात तलाक तक पहुंच गई थी। इस पूरे मामले को पुलिस इससे भी जोड़कर देख रही है।
14 जनवरी की शाम को कमरे में मिले थे शव 12 जनवरी को देहरादून के रायपुर से सुरेंद्र कुमार (61) पुत्र ताराचंद, पत्नी कमलेश देवी (57), बेटी नीलम (31) और बेटा नितिन (33) मेहंदीपुर बालाजी आए थे। यहां रामा-कृष्णा आश्रम धर्मशाला के कमरा नं. 119 में रुके हुए थे। 13 जनवरी की सुबह करीब 9 बजे सुरेंद्र और नीलम को पेट में दर्द व उल्टी की शिकायत हुई थी। नितिन दोनों को लेकर महंत किशोरपुरी हॉस्पिटल पहुंचा था। यहां डॉक्टर ने दोनों का इलाज किया। इसके बाद वापस धर्मशाला आ गए थे।

धर्मशाला के कर्मचारी ने सबसे पहले देखे थे शव 14 जनवरी की सुबह 6 बजे परिवार धर्मशाला से निकला था। इसके दो घंटे बाद लौट आए थे। शाम करीब 7:30 बजे धर्मशाला के कर्मचारी मोहनलाल योगी ने कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला देखा। जब उसने अंदर झांका तो चारों बेसुध पड़े दिखाई दिए। उसने तुरंत धर्मशाला मालिक गुड्डू शर्मा को सूचना दी। उसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई। करौली और भरतपुर से एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया गया। धर्मशाला के कमरे को सील कर दिया गया था।
15 जनवरी की रात को रिश्तेदार पहुंचे 15 जनवरी की रात 8 बजे देहरादून से सुरेंद्र कुमार (मृतक) के भाई मुकेश, सुरेंद्र के साले के लड़के सुशील, बड़े भाई के बेटे सहित 4 लोग मेहंदीपुर बालाजी पहुंचे। रात करीब 9 बजे करौली जिले के टोडाभीम थाने पहुंचे और पुलिस से पूरे मामले की जानकारी ली। साथ ही सुरेंद्र कुमार और उसके पूरे परिवार की मौत के मामले में हत्या की आशंका जताई है। मुकेश की ओर से टोडाभीम थाने में रिपोर्ट दी गई है। पुलिस मामले को संदिग्ध मान रही है। सुरेंद्र (मृतक) का बड़ा भाई महेंद्र और छोटा भाई मुकेश (52) खुद की टूरिस्ट गाड़ी चलाते हैं।

उत्तराखंड पुलिस में तैनात युवक से की थी बेटी की शादी सुशील कुमार ने बताया कि फूफाजी (सुरेंद्र कुमार) ने नीलम (सुरेंद्र की बेटी) की उत्तराखंड पुलिस में तैनात नरेश कुमार के साथ शादी की थी। शादी के एक महीने बाद ही आपसी विवाद के कारण नीलम अपने पीहर में माता-पिता के पास रहने लगी। नीलम और नरेश के बीच दहेज का केस चल रहा है। इसी बीच विवाद ज्यादा बढ़ने पर दोनों के बीच तलाक का मामला भी चलने लगा, जो अभी कोर्ट में विचाराधीन है। इसे लेकर नीलम के पिता सुरेंद्र कुमार परेशान रहते थे। इन सब के बावजूद इतना भी परेशान नहीं थे कि सामूहिक आत्महत्या जैसा कदम उठा लें। परिवार का कोई भी सदस्य इतना तनाव में नहीं था कि सुसाइड कर ले।
कोर्ट ने नरेश कुमार को हर महीने 6 हजार रुपए मासिक भत्ता के रूप में नीलम को देने का आदेश दिया था। वह (नरेश) नियमित रूप से मासिक भत्ता देता भी है। करीब 4 महीने पहले नीलम के पिता सुरेंद्र ने इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपए करने की याचिका दायर की थी।
नहीं बचा अब कोई परिवार में सुशील ने बताया कि अब परिवार में कोई भी नहीं बचा है। परिवार में बस 4 ही लोग थे। अब सोचिए हम लोगों पर क्या बीत रही होगी। सुशील ने बताया कि जिस तरीके से हमने शवों को देखा है। कुछ ना कुछ तो हुआ है, जो एक जांच का विषय है। पुलिस हमारा सहयोग कर रही है और पूरी जांच कर रही है और जांच पर हमें भरोसा है।

सुरेंद्र के छोटे भाई के आंखों में आए आंसू सुरेंद्र कुमार (मृतक) के छोटे भाई मुकेश कुमार ने कहा- चारों के शव यहां से लेकर जाऊंगा। कितना बड़ा संकट आज है। उनके पीछे अब कोई नहीं बचा है। बहुत खुशहाल परिवार था। हंसी-खुशी रहते थे। अच्छे से रहता था। बालाजी महाराज के यहां आते रहते थे। भंडारा भी यहां करते थे। पता नहीं बालाजी महाराज की कैसी कृपा रही। चारों की एक साथ माैत होना संदिग्ध है। पुलिस-प्रशासन हमारे साथ खड़ा है। उनके परिवार में कोई मन मुटाव नहीं था। आर्थिक रूप से भी मजबूत थे।
जांच के दौरान रूम में दाल और टैबलेट्स मिलीं DSP मुरारी लाल मीना ने बताया- कमरे की जांच के दौरान पुलिस को एक दाल का पैकेट मिला है। साथ ही कुछ टैबलेट्स भी मिली हैं। रूम से कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला है। बुधवार देर शाम मृतकों के परिजन थाने पहुंचे, जहां उन्हें शवों की पहचान कराई गई। इस मामले में मृतकों के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया है। ऐसे में टोडाभीम थाना पुलिस द्वारा मेहंदीपुर बालाजी कस्बे में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए मेडिकल बोर्ड के नेतृत्व में चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया किया गया। गुरुवार दोपहर शवों को परिवार वालों को सौंप दिया गया।






