Home » राजस्थान » नाबालिग पर रोजा-कलमा का दबाव बनाना गंभीर अपराध:बिजयनगर रेप-ब्लैकमेल कांड, पूर्व पार्षद की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा- हिंदू धर्म छोड़ने का बनाया दबाव

नाबालिग पर रोजा-कलमा का दबाव बनाना गंभीर अपराध:बिजयनगर रेप-ब्लैकमेल कांड, पूर्व पार्षद की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा- हिंदू धर्म छोड़ने का बनाया दबाव

अजमेर की पॉक्सो कोर्ट ने बिजयनगर रेप-ब्लैकमेल कांड में मुख्य आरोपी पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी की जमानत याचिका बुधवार को खारिज कर दी। एक अन्य नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी।

न्यायालय ने टिप्पणी में कहा कि नाबालिग बालिका पर रोजा और कलमा पढ़ने का दबाव बनाना, उनकी पसंद के कपड़े पहनने और आरोपियों के साथ जाने को मजबूर करना गंभीर प्रकृति का अपराध है। पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने बताया कि मुकदमा नंबर 61 में गिरफ्तार पूर्व पार्षद की जमानत याचिका खारिज की गई है।

कोर्ट ने कहा कि पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी ने पीड़िता को डरा-धमकाकर आरोपी सोहेल के साथ भेजने का षड्यंत्र रचा गया। आरोपियों ने कहा था कि पीड़िता के 18 साल की होने पर सोहेल उसे भगाकर निकाह कर लेगा। उसे हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।

वकील ने बताया कि पांच अन्य आरोपियों की भी जमानत याचिकाएं लगी हैं, जिनमें तीन नाबालिग और दो बालिग हैं। इन सभी की सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं।

पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

पूर्व पार्षद पर लगे गंभीर आरोप पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व पार्षद हकीम कुरैशी धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाता था और आरोपियों से दोस्ती करने के लिए मजबूर करता था। इतना ही नहीं, लड़कियों को आरोपियों की पसंद के कपड़े पहनने के लिए भी विवश किया जाता था।

कुरैशी पीडि़ताओं पर फिजिकल रिलेशन बनाने का दबाव भी बनाता था। वह पीडि़ताओं को उनकी अन्य सहेलियों से भी मिलवाने के लिए प्रेरित करता था, ताकि और लड़कियों को भी इस गिरोह में शामिल किया जा सके। आरोपी पीडि़ताओं को अन्य आरोपियों के साथ कैफे में भेजता था और इसके लिए आरोपियों को पैसों से भी मदद करता था।

परिवारों ने की जमानत का विरोध मामले में तीन मुकदमों में पीडि़ताएं के परिवार वालों ने भी न्यायालय से जमानत न देने की मांग की। परिवारों का आरोप है कि आरोपियों के परिवार वाले उन्हें लगातार धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी आरोपियों ने उनकी बच्चियों के साथ गंभीर अपराध किया है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जाए।

वकील ने बताया कि पांच अन्य आरोपियों की भी जमानत याचिकाएं लगी हैं, जिनमें तीन नाबालिग और दो बालिग हैं। इन सभी की सुनवाई के लिए अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं

15 फरवरी को बिजयनगर थाने में मामला दर्ज हुआ था। हिंदू संगठन के लोग थाने पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे।
15 फरवरी को बिजयनगर थाने में मामला दर्ज हुआ था। हिंदू संगठन के लोग थाने पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे।

अब सिलसिलेवार पढ़िए पूरा घटनाक्रम… 15 फरवरी को सामने आया था मामला 15 फरवरी को बिजयनगर थाने में एक नाबालिग लड़की ने मामला दर्ज कराया था। उसके बाद एक और नाबालिग ने मामला दर्ज कराया था। फिर तीन लड़कियों के पिता की ओर से भी रिपोर्ट दी गई थी। आरोप था कि ये प्राइवेट स्कूल में पढ़ रही नाबालिग लड़कियों का रेप और अश्लील फोटो-वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर रहे थे।

जबरन कलमा पढ़ने, रोजा रखने और धर्मांतरण के लिए विवश कर रहे थे। पुलिस ने पॉक्सो सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामला सामने आने के बाद बिजयनगर समेत कई जगह प्रदर्शन हुए और आरोपियों को अरेस्ट करने की मांग उठी। पुलिस ने जब एक-एक कर आरोपियों को पकड़ा तो मामले से पर्दा उठने लगा। आरोपियों में एक पूर्व पार्षद भी शामिल था।

टेंपो ड्राइवर ने पहली लड़की को फंसाया था 21 साल के आशिक पुत्र राज मोहम्मद मंसूरी बिजयनगर का रहने वाला है। टेंपो चलाता था। सबसे पहली लड़की को आशिक ने ही फंसाया था। आशिक अक्सर छात्रा के स्कूल के रास्ते में खड़ा रहता था। पहले उसने छात्रा से दोस्ती की थी। उसे की-पैड वाला छोटा सा चाइनीज मोबाइल दिला दिया था। रोज फोन पर उससे बात करता था। वह छात्रा से इंस्टाग्राम पर भी जुड़ गया था। छात्रा से फोटो-वीडियो मंगवाए थे।

इतना ही नहीं, वह उसे बाहर घुमाने भी ले जाने लगा था। इसी दौरान उसने छात्रा के आपत्तिजनक वीडियो बना लिए और ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। इसी छात्रा के सहारे उसने एक अन्य लड़की को भी फंसा लिया था। पहली लड़की के नंबर और उसके वीडियो अपने साथियों को शेयर कर दिए थे।

18 फरवरी को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था। इस दौरान वकीलों ने पुलिस के घेरे में चल रहे आरोपियों को पीट दिया था।
18 फरवरी को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था। इस दौरान वकीलों ने पुलिस के घेरे में चल रहे आरोपियों को पीट दिया था।

एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता था, कोई मजदूर, कोई वेल्डर आरोपी दोस्त थे। इनमें से कुछ एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे। सभी हमाली, वेल्डिंग, पेंट करने और फर्नीचर का काम करते थे। एक भी आरोपी स्कूल में नहीं पढ़ता था। इसके बावजूद इन्होंने कई स्कूल गर्ल्स को फंसा लिया था। इन्होंने जिन लड़कियों को शिकार बनाया, वे भी एक ही मोहल्ले के आस-पास की रहने वाली थी।

आरोपियों ने एक के बाद एक कई लड़कियों को शिकार बनाया था। गिरोह में शामिल हर आरोपी इन लड़कियों के नंबर एक-दूसरे से शेयर करता था। जो भी लड़की आरोपियों का शिकार बनती, उसके अश्लील फोटो वीडियो बना लिए जाते थे। इसी के दम पर ब्लैकमेल किया जाता था। लड़कियों पर रोजा रखने और कलमा पढ़ने के लिए भी दबाव डाला जाता था।

20 फरवरी को कैफे के बाहर हुए अवैध निर्माण को तोड़ा गया था। इसी कैफे में बच्चियों के साथ हैवानियत हुई थी।
20 फरवरी को कैफे के बाहर हुए अवैध निर्माण को तोड़ा गया था। इसी कैफे में बच्चियों के साथ हैवानियत हुई थी।

आरोपियों का अजमेर ब्लैकमेल कांड जैसा ही तरीका था सभी आरोपियों का नाबालिग बच्चियों को फंसाने और शिकार करने का तरीका साल 1992 में हुए अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों के तरीके जैसा ही था। यहां भी आरोपियों ने एक ही प्राइवेट स्कूल की बच्चियों को टारगेट कर रखा था। दरअसल इन सभी बच्चियों के स्कूल आने-जाने का रास्ता कुछ आरोपियों के मोहल्ले के पास से होकर गुजरता था। आरोपियों ने इसका ही फायदा उठाया था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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