Home » राजस्थान » पत्नी से कहा-चिंता मत करना, आधे घंटे बाद जिंदा जला:टैंकर तक आग पहुंचती तो एक किलोमीटर का इलाका तबाह हो जाता

पत्नी से कहा-चिंता मत करना, आधे घंटे बाद जिंदा जला:टैंकर तक आग पहुंचती तो एक किलोमीटर का इलाका तबाह हो जाता

25 जून की सुबह करीब 8 बजे जयपुर-अजमेर हाईवे के मोखमपुरा ओवर ब्रिज पर मिथाइल अल्कोहल से भरा एक गैस टैंकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जयपुर की ओर आ रहा टैंकर पलटने के बाद पहली से तीसरी लेन में डिवाइडर से टकराकर रुका।

जब तक कोई टैंकर के पास पहुंचता केबिन आग का गोला बन गया था। दाहिने साइड से पलटने के कारण ड्राइवर राजेंद्र यादव को केबिन से बाहर आने का मौका तक नहीं मिल सका।

आग सिर्फ केबिन में ही लगी। कयास लगाया जा रहा है कि सड़क पर रगड़ने के बाद निकली चिंगारी से फ्यूल (डीजल) टैंक में आग लगी होगी, जिससे आग केवल केबिन तक ही रही।

टैंकर तक आग पहुंच गई होती तो एक किलोमीटर का इलाका तबाह हो गया होता।

ट्रोले में लगी आग के कारण केबिन पूरी तरह जल गया।
ट्रोले में लगी आग के कारण केबिन पूरी तरह जल गया।

2 से 3 किलोमीटर लम्बा जाम लगा मोखमपुरा थाना SHO संजय प्रसाद ने बताया- सूचना मिली कि मोखमपुरा के पास गैस टैंकर पलट गया है। तुरंत पुलिस, SDM, ADM, दमकल, SDRF और सिविल डिफेंस टीम भी पहुंची। टीम ने तुरंत रिहायशी इलाका, होटल, ढाबा खाली करवाया और आग बुझाने में जुट गई। इस बीच अजमेर और जयपुर से आने-जाने वाले वाहनों को भी रुकवा दिया गया। इससे 2 से 3 किलोमीटर लम्बा जाम लग गया।

टीम को केबिन में कोई नहीं मिला। ध्यान से देखा तो ड्राइवर सीट पर राजेंद्र के शरीर का कुछ हिस्सा बुरी तरह जला हुआ पड़ा था। पुलिस ने फौरी कार्रवाई करने के बाद शव के अवशेष को सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में रखवाया। राजेंद्र के ससुर और उनका साला अखिलेश यादव यूपी के गाजीपुर से आज (गुरुवार) दोपहर तक जयपुर पहुंचेंगे।

भास्कर रिपोर्टर जब मौके पर पहुंचा तो टैंकर को मोखमपुरा घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर आगे महादेव ढाबे पर खड़ा करवा रखा था। टैंकर में अब भी हजारों लीटर ज्वलनशील केमिकल मौजूद है। भास्कर संवाददाता ने केबिन के बाहर खोपड़ी का एक टुकड़ा देखा तो इसकी सूचना वहां तैनात RAC जवानों को दी। इसके बाद थाने से पुलिस टीम आई और खोपड़ी के उस हिस्से को पन्नी में लेकर एसएमएस हॉस्पिटल भिजवा दिया। राजेंद्र का शरीर इस कदर जल चुका है कि उसे पहचानना भी मुश्किल है।

टैंकर में लगी आग को बुझाने के लिए फोम का इस्तेमाल किया गया। फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट के कई सीनियर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
टैंकर में लगी आग को बुझाने के लिए फोम का इस्तेमाल किया गया। फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट के कई सीनियर अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

पत्नी बच्चों को नहीं बताया, अकेला कमाने वाला था राजेंद्र राजेंद्र के मामा ससुर के बेटे अखिलेश ने बताया कि राजेंद्र की मौत की जानकारी उसकी पत्नी बिंदा को नहीं दी गई है। उन्हें सिर्फ इतना बताया है कि जयपुर में राजेंद्र का एक्सीडेंट हो गया है। राजेंद्र अपने परिवार का अकेला कमाने वाला था। उसके परिवार में मां, पत्नी बिंदा, 16 साल की बेटी प्रीति, 14 साल का बेटा शिवम, 10 साल की बेटी पिंकी और 9 साल का बेटा शुभम है। राजेंद्र के पिता का 2023 में देहांत हो गया था।

राजेंद्र की मौत की जानकारी उसकी पत्नी और बच्चों को नहीं दी गई है।
राजेंद्र की मौत की जानकारी उसकी पत्नी और बच्चों को नहीं दी गई है।

टैंकर तक आग पहुंचती तो एक किलोमीटर में होती तबाही गनीमत रही कि केमिकल टैंकर में आगे की तरफ आग लगी। यह आग पीछे टैंकर तक नहीं पहुंची, वर्ना केमिकल में ब्लास्ट हो सकता था। इससे आसपास के एक किलोमीटर का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता था। टैंकर के पीछे और अजमेर जाने वाली दूसरी लेन के वाहन भी इसकी चपेट में आ सकते थे। जब आग बुझाई गई तब भी इससे केमिकल का रिसाव हो रहा था। बचाव टीम ने सावधानीपूर्वक स्थिति को काबू किया। जिस जगह हादसा हुआ, उसके आस पास ढाबे और रेस्टोरेंट भी हैं।

पुलिस के अनुसार, केमिकल भरा टैंकर गुजरात से भिवाड़ी जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, केमिकल भरा टैंकर गुजरात से भिवाड़ी जा रहा था।

चश्मदीद बोला- दायां हाथ दरवाजे के बाहर से दिख रहा था हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों में से एक पिंटू यादव हैं। उन्होंने बताया- जब हादसा हुआ तो वह अपनी दुकान में ही थे। टैंकर पलटा तो भागकर वहां पहुंचे। दूर से देखा तो एक हाथ नजर आ रहा था, जो टैंकर के केबिन से ड्राइवर साइड से बाहर निकला हुआ था। शायद हाथ दब जाने की वजह से ही ड्राइवर बाहर नहीं निकल पाया होगा। टायर ब्लास्ट होने की आवाज भी सुनी थी। टैंकर के पलटने के बाद करीब डेढ़ से दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका।

ऐसे हुआ हादसा जयपुर की तरफ आ रहे टैंकर का ड्राइवर की तरफ का टायर ब्लास्ट हो गया। इससे वह अनियंत्रित होकर हाईवे पर पलट गया। ड्राइवर की तरफ से पलटने के कारण केबिन से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। केबिन का दरवाजा भी संभवतः लॉक हो गया था। जब तक कोई टैंकर तक पहुंच पाता, केबिन आग का गोला बन चुका था। आग बुझने पर वहां केवल राजेंद्र की हड्डियां, राख और कुछ अवशेष ही बचे थे।

तीन बड़े हादसों का गवाह बना मोखमपुरा फ्लाईओवर मोखमपुर के महादेव ढाबे पर जिस जगह गैस टैंकर को खड़ा किया गया है, उससे ठीक 20 मीटर आगे जयपुर गैस टैंकर कांड में सवारियों से भरी स्लीपर बस का ढांचा आज भी खड़ा है। उस हादसे में 27 लोग जिंदा जल गए थे।

इसी जगह जनवरी में भीलवाड़ा से कुंभ जा रही एक ईको कार का एक्सीडेंट हुआ था। इसमें एक ही गांव के 8 लोगों की मौत हो गई थी। बुधवार को हुए इस ताजा हादसे ने भी हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

Top Headlines

नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन कल से:जयपुर निगम के लिए 15 RO ऑफिस बनाए; पाली नगर निगम, फतेहपुर नगर परिषद में वोटिंग की डेट बदली

प्रदेश में नगरीय निकाय (नगर निगम, नगर ​परिषद और नगर पालिका) चुनावों की कल (27 अगस्त) कल लोकसूचना जारी होने