Poola Jada
Home » राजस्थान » एंबुलेंस में रखे सिलेंडर में ऑक्सीजन नहीं थी, बीच रास्ते महिला की मौत, चालक सड़क पर छोड़ भागा

एंबुलेंस में रखे सिलेंडर में ऑक्सीजन नहीं थी, बीच रास्ते महिला की मौत, चालक सड़क पर छोड़ भागा

मुहाना इलाके में बुधवार को निजी अस्पताल की लापरवाही के चलते शिमला देवी (58) की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टर और एंबुलेंस चालक पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुहाना थाने में रिपोर्ट दी है। भोपाओं की ढाणी, मुहाना निवासी शिमला देवी को सोमवार से बुखार था। बुधवार को तबीयत खराब होने पर एडवांस हॉस्पिटल लेकर गए। जांच के बाद डॉक्टरों ने स्क्रब टायफस बताकर 3 दिन भर्ती कराने को कहा। मात्र 2 घंटे बाद ही शिमला देवी की हालत बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने मरीज को एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया और एंबुलेंस (RJ14 PF 9675) से रवाना कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट शुरू ही नहीं किया गया। रास्ते में तबीयत और बिगड़ी तो पता चला कि सिलेंडर में ऑक्सीजन ही नहीं है। बार-बार कहने पर दूसरा सिलेंडर लगाया गया, लेकिन इसी बीच हालत गंभीर हो गई। चौ​रड़िया पेट्रोल से 200 मीटर न्यू सांगानेर रोड पर एंबुलेंस चालक गाड़ी छोड़कर भाग गया। परिजन शिमला देवी को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ भी की। परिजनों ने 100 नंबर व 108 पर फोन किया। शाम करीब 4 बजे शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

जीवनभर संघर्ष किया मगर सिस्टम से हार गईं; 20 साल पहले पति की मौत, 4 बेटियों को पाला

जिंदगीभर सिलाई कर बच्चों की परवरिश; बेटी मोना ने बताया कि हमारे पिता की मौत 20 साल पहले हो गई थी। मां पर ही हम चारों बहनों की जिम्मेदारी थी। उन्होंने जिंदगीभर सिलाई कर हमारी परवरिश की। पहले हमें पढ़ाया और फिर अच्छे से सभी की शादियां भी की। उनका ​जीवन संघर्ष में गुजरा और अब जाते-जाते भी उनको बीमारी से संघर्ष करना पड़ा। अभी वह छोटी बेटी मोना व दामाद मोहनलाल कुमावत के साथ रह रहे थीं।

अस्पताल का तर्क; फेफड़े खराब हो चुके थे, प्लेटलेट्स 36 हजार ही थीं

एडवांस हॉस्पिटल के डॉ. गोपाल गुप्ता का कहना है कि शिमला देवी को सुबह 10 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उन्हें सांस लेने में परेशानी थी। जांच में पता चला कि वे पिछले 10 दिन से स्क्रब टायफस से पीड़ित थीं। उनके फेफड़े काफी खराब हो चुके थे और प्लेटलेट्स 36 हजार थे। परिजन पहले घर पर ही इलाज कराते रहे और मंगलवार रात हालत ज्यादा बिगड़ने पर बुधवार को अस्पताल लाए। डॉक्टर का कहना है कि मरीज के परिजनों ने अस्पताल में मारपीट भी की है, जिसकी रिपोर्ट मुहाना थाने में दी गई है।

2 घंटे में 17 हजार का बिल बनाया; परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने दो घंटे के भीतर 17 हजार रुपए का बिल बना दिया और बिना इलाज सही ढंग से किए रैफर कर दिया। उन्हें पता था कि मरीज बिना ऑक्सीजन नहीं रह सकती, फिर भी बिना सुविधा के रेफर किया गया।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

infoverse academy

Top Headlines

टेंपोट्रेक्स की टक्कर से बाइक सवार की मौत:गुढ़ागौड़जी में स्टेट हाईवे-37 पर हुआ हादसा

गुढ़ागौड़जी कस्बे के लीला की ढाणी क्षेत्र में शुक्रवार शाम स्टेट हाईवे-37 पर हुए एक सड़क हादसे में बाइक सवार