प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) से अंतरिम राहत मिली हैं। कैट ने पंकज चौधरी की प्रमोशन याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को उनके बकाया प्रमोशन प्रोविजनली डीपीसी में कंसीडर करने के लिए कहा हैं।
ऐसे में इस साल होने वाली डीपीसी में अगर पंकज चौधरी को प्रोविजनली कंसीडर किया जाता है तो वे पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) रैंक पर प्रमोट होंगे। हालांकि कोर्ट ने यह साफ किया है कि उनकी पदोन्नति याचिका के फाइनल निस्तारण के अधीन रहेंगी।
तीन प्रमोशन चल रहे है ड्यू अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल ने बताया कि आईपीएस पंकज चौधरी के खिलाफ चल रहे अलग-अलग प्रकरणों के कारण उनके तीन प्रमोशन बकाया चल रहे हैं। साल 2018 से जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव, 2021 से सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव और साल 2023 से डीआईजी रैंक का प्रमोशन बकाया चल रहा हैं।
हमने कैट को बताया कि जिन अलग-अलग प्रकरणों के कारण सरकार ने प्रमोशन रोका है। उन तमाम प्रकरणों की जांच समयबद्ध तरीके से करने के आदेश कैट ने सरकार को दे रखे हैं। लेकिन सरकार ने किसी भी मामले की जांच पूरी नहीं की हैं। वहीं जांच अधूरी रहने के कारण प्रमोशन भी रोका हुआ है।
इस पर कोर्ट ने पंकज चौधरी के बकाया प्रमोशन देने के निर्देश दिए हैं।
पहली बार किसी आईपीएस का डिमोशन हुआ लेकिन इसी मामले में जांच के बाद फरवरी 2025 में सरकार ने इनका डिमोशन कर दिया। राजस्थान के इतिहास में पहली बार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी का डिमोशन हुआ। इससे पहले किसी भी आईपीएस अधिकारी पर ऐसी कार्रवाई नहीं की गई थी।
कार्मिक विभाग की जांच के बाद चौधरी का 3 साल के लिए डिमोशन किया गया। उन्हें लेवल 11 की वेतन श्रृंखला से लेवल 10 की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला में डिमोशन किया गया। जॉइनिंग के समय फ्रेशर आईपीएस को कनिष्ठ वेतन श्रृंखला (जूनियर पे स्केल) मिलती है।
लेकिन बाद में कैट ने इस आदेश पर भी रोक लगा दी।





