नीमकाथाना से दो बार विधायक रहे फूलचंद गुर्जर का शुक्रवार को जयपुर में निधन हो गया। कुछ दिन से फूलचंद गुर्जर बीमार चल रहे थे। उनका जयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
परिवार से मिली जानकारी अनुसार उनका नीमकाथाना में अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूर्व विधायक के निधन के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
टीचर से विधायक तक तय किया सफर फूलचंद गुर्जर का जन्म 1953 में सीकर को मोठूका में हुआ था। उन्होंने 1972 से 1978 तक सरस्वती विद्या निकेतन, बनीपार्क, जयपुर में अध्यापक के रूप में कार्य किया। इसके बाद वह 1978 में ग्राम पंचायत, बेगा की नांगल के सरपंच चुने गए। 5 साल वह बेगा की नांगल के सरपंच रहे।

नीमकाथाना से दो बार रहे विधायक फूलचंद गुर्जर ने 1985 से 1990 तक आठवीं राजस्थान विधानसभा और 1990 से 1992 तक नौवीं राजस्थान विधानसभा में सदस्य के रूप में सेवा दी। वही फूलचंद गुर्जर 1993 और 1998 में भी भारतीय जनता पार्टी से विधायक प्रत्याशी रहे थे। विधानसभा सदस्य के तौर पर उन्होंने विभिन्न समितियों में भी भूमिका निभाई। वे 1985-1987 तक अधीनस्थ विधान संबंधी समिति, 1987-1988 तक पुस्तकालय समिति और 1988-1990 तक सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति के सदस्य रहे। इसके अतिरिक्त, वे 1990 से 1992 तक प्राक्कलन समिति (ख) के सदस्य भी थे। फूलचंद गुर्जर नीमकाथाना में किसान नेता के नाम से जाने जाते हैं।
भाजपा नेता प्रमोद बिजौर ने बताया-पूर्व विधायक के निधन पर भाजपा पार्टी को एक क्षति पहुंची है। उनका कार्यकाल संघर्ष भरा रहा है। किसानों के हितों में कई लड़ाइयां लड़ी।
बेटा व पुत्र बहू रह चुकी प्रधान फूलचंद गुर्जर के बेटे संतोष गुर्जर पाटन पंचायत समिति के प्रधान रह चुके हैं। 2015 से 2020 तक तक संतोष गुर्जर पाटन प्रधान रहे थे उसके बाद 2020 में हुए पंचायत समिति चुनाव के वह पंचायत समिति सदस्य चुने गए। दो साल पहले उनका हार्ट अटैक से निधन हो गया था। वही संतोष गुर्जर की बहू बहू चंदा देवी नीमकाथाना पंचायत समिति की 2005 से 2010 तक प्रधान रह चुकी है।
खेल प्रतियोगिता में रहे विजेता पूर्व विधायक फूलचंद गुर्जर का जन्म मोठूका में हुआ था और उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से इतिहास में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की शिक्षा प्राप्त की थी। वह वॉलीबॉल व बास्केटबॉल के जिला स्तरीय विजेता भी रहे। वे सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए भी सक्रिय थे।
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