सीकर में युवक से शादी का वादा करके तलाक करवाने और सुसाइड के लिए उकसाने पर युवती के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। सीकर जिले के उद्योग नगर थाने में युवक के परिजनों ने इस्तगासे के जरिए 16 जनवरी को मामला दर्ज कराया है।
उद्योग नगर थाने में दर्ज मुकदमे के अनुसार परडोली बड़ी निवासी लक्ष्मीनारायण ने सीकर के रामलीला मैदान निवासी युवती के खिलाफ शादी करने के वादा से मुकरने और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करवाया है। रिपोर्ट के अनुसार परिवादी लक्ष्मीनारायण का पोता सुनील कुमार सीकर में रानी शक्ति रोड पर किराए का मकान लेकर रहता था। युवती के कहने पर सुनील ने 25 नवंबर 2025 को आत्महत्या कर ली थी।
ब्लैकमेल कर रुपए लेती रही, जाति का हवाला देकर किया शादी से मना रिपोर्ट में लक्ष्मीनारायण ने बताया- सुनील ने सुसाइड करने से कुछ दिन पहले बताया था कि युवती उससे शादी करना चाहती थी। युवती के कहने पर ही सुनील ने पहली पत्नी से तलाक ले लिया था। फिर वो लड़की ब्लैकमेल करने लगी और समान जाति का न होने पर शादी के लिए मना कर दिया। फिर वो युवती मोबाइल पर चैटिंग करके शादी का झूठा आश्वासन देती रही।
युवती बीच-बीच में उससे पैसे भी लेती रही। बाद में युवती ने जाति का हवाला देकर मना करते हुए सुनील से सुसाइड करने के लिए कह दिया। मृतक सुनील के फोन में युवती के फोटो और रिकॉर्डिंग भी मौजूद हैं। पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो इस्तगासे के जरिए मामला दर्ज करवाया गया है।
धोखाधड़ी से रजिस्ट्री ट्रांसफर कराने का मामला दर्ज सीकर जिले के कोतवाली थाने में जमीन का कन्वर्जन करवाने के दौरान फर्जी तरीके से जमीन की रजिस्ट्री करवाने का इस्तगासे के जरिए मामला दर्ज हुआ है। इसके अनुसार एक महिला ने मृत पति के नाम की जमीन की धोखाधड़ी से रजिस्ट्री ट्रांसफर करवाने और वकील के साथ मिलकर फर्जी तरीके से नामांतरण कैंसिल करवाने का मामला दर्ज है। परिवादी हसीना बावरिया ने एडवोकेट राजेंद्र जाखड़ के जरिए कोर्ट इस्तगासे के माध्यम से कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। परिवादी हसीना बावरिया ने रिपोर्ट में बताया है कि भू माफियाओं ने जमीन हड़पने के लिए कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल किया।
पति की मौत के बाद आरोपियों ने की धोखाधड़ी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज के अनुसार परिवादी हसीना बावरिया ने बताया- उसके पति पन्नालाल बावरिया की मौत हो चुकी है। पन्नालाल ने 30 अप्रैल 2013 में खसरा नंबर 945/388 का कन्वर्जन करवाया था, उस दौरान आरोपी मदनलाल और बृजमोहन ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसी जमीन को फर्जी खसरा नंबर 963/388 बताकर 0.2 हैक्टेयर जमीन को रेजिडेंशियल बताकर बेचान कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार मांगीलाल ने उसी जमीन को एक और फर्जी खसरा नंबर 964/388 बताकर खरीद लिया। दोनों ही रजिस्ट्री में अशोक कुमार और मोहन गवाह थे। वर्ष 2020 में संबंधित जमीन का पन्नालाल के वारिसों के नाम नामांतरण खुला तो आरोपियों ने वकील श्रवण कुमार व ताराचंद यादव के साथ मिलकर नामांतरण कैंसिल का दावा कर दिया तथा पन्नालाल के वारिसों के बिना नोटिस तामिल करवा दिए।
कोतवाली में इस्तगासे के जरिए दर्ज रिपोर्ट के अनुसार हसीना बावरिया ने कहा- आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज बनाकर असली जमीन के नकली कागजात बनाए और फिर नामांतरण के समय पन्नालाल के वारिसों को नोटिस तामील करवाने की बजाय दोनों पक्ष के वकील खड़े करके नामांतरण खारिज करवाने का काम किया। अब कोर्ट ने खसरा नंबर 963/388 और 964/388 को अस्तित्व में ना मानते हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।





