अजमेर में महज 53 हजार रुपए के लालच में दोस्त की हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी को 10 साल का कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने उस पर 60 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है, जिसमें से 20 हजार रुपए मृतक की पत्नी को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश भी दिए गए हैं।
न्यायालय ने अपने फैसले में इसे विश्वासघात और लोभ से प्रेरित जघन्य अपराध बताते हुए सख्त टिप्पणी की। ये फैसला अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) उत्तमा माथुर ने सुनाया है।
आरोपी ने मनोज पर चाकू से किए थे ताबड़तोड़ हमले
अदालत ने कहा कि आरोपी ने मनोज पर चाकू से ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे उसकी मौत हो गई। बिना अनुमति धारदार हथियार चाकू रखने प्रकरण के तथ्य और परिस्थितियों को देखते हुए अपराध प्रमाणित है।
अपर लोक अभियोजक नरेश धूत ने अदालत में 21 गवाह, 35 दस्तावेज और 5 आर्टिकल पेश कर सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। मामले में वकील मनीष हजारी ने पैरवी की।
53 हजार रुपए ई-मित्र से ट्रांसफर करवाने को लेकर विवाद
लोक अभियोजक के अनुसार, 53 हजार रुपए ई-मित्र से ट्रांसफर करवाने को लेकर विवाद हुआ था। वीरेंद्र ने मनोज को 53 हजार रुपए ट्रांसफर करने के लिए दिए। पेमेंट प्रोसेस में समय लगने पर वीरेंद्र ने रुपए वापस मांगे तो मनोज ने कहा कि मामला प्रोसेस में है। इस पर नाराज होकर वीरेंद्र ने चाकू से मनोज पर हमला कर दिया।
जेएलएन अस्पताल में गंभीर हालत में तोड़ा था दम
मृतक की पत्नी परिवादिया रुक्मणी ने क्रिश्चियनगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कर बताया कि 20 दिसंबर 2023 को शाम 6-7 बजे उसके पति बंजारा बस्ती में अपनी कम्प्यूटर सर्विस की दुकान पर थे।
इसी दौरान उनकी दुकान के मालिक कैलाश चंद साहू उसके घर आए और बताया कि मनोज पर उनके दोस्त वीरेंद्रपाल ने चाकू से हमला कर दिया है। जिसके बाद मनोज को इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में उसे जेएलएन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जेएलएन अस्पताल में इलाज के दौरान मनोज की मौत हो गई।





