भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी के विरूद्ध दण्ड की मात्रा बढ़ाने का किया अनुमोदन
अभियोजन स्वीकृति, 17-ए एवं विभागीय जांच के 50 से अधिक प्रकरण किए निस्तारित
न्यूज इन राजस्थान सुनील शर्मा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के लिए जवाबदेहिता और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। इसी दिशा में जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं भ्रष्टाचार के दोषी कार्मिकों के विरुद्ध निरंतर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति, 17-ए एवं विभागीय जांच के 50 से अधिक प्रकरणों को निस्तारित किया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने निजी व्यक्तियों के पक्ष में गैर कानूनी तरीके से आदेश पारित कर अवैध लाभ पहुंचाने के आरोपों में तत्कालीन उपखण्ड अधिकारी सहित सार्वजनिक निर्माण एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के दो अधिकारियों के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति दी।
*कृषि उपज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव राज्य सेवा से पदच्युत-*
साथ ही, न्यायालय से दोषसिद्ध होने के आधार पर कृषि उपज मण्डी समिति के तत्कालीन सचिव को राज्य सेवा से पदच्युत किया गया तथा निरन्तर लंबी अनुपस्थिति के आधार पर एक अन्य अधिकारी को राजकीय सेवा से हटाया गया। इसी प्रकार उन्होंने पद के दुरूपयोग, अनियमित भुगतान एवं राजकोष को हानि पहुंचाए जाने के आरोपों के तहत तत्कालीन विकास अधिकारी के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच एवं अनुसंधान का भी अनुमोदन किया।
*राज्य सेवा के 27 अधिकारी गंभीर आरोपों में दो से चार वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोके जाने की शास्ति से दण्डित-*
मुख्यमंत्री ने भारतीय पुलिस सेवा के एक अधिकारी के विरूद्ध दो प्रकरणों में संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से दण्ड की मात्रा बढ़ाने का अनुमोदन किया। साथ ही, राज्य सेवा के अधिकारियों के विरूद्ध संचालित सीसीए नियम-16 में गंभीर आरोपों के 23 प्रकरणों में 27 अधिकारियों के विरूद्ध दो से चार वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोके जाने की शास्ति से दण्डित किया।
*पांच प्रकरणों में सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने का अनुमोदन-*
मुख्यमंत्री शर्मा ने सेवानिवृत्त अधिकारियों के पांच प्रकरणों में पेंशन रोकने तथा अन्य नौ प्रकरणों में प्रमाणित आरोपों के जांच निष्कर्ष का अनुमोदन करते हुए राज्यपाल को प्रकरण अग्रेषित किए। वहीं, राज्य सेवा के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत अपील के पांच प्रकरणों में से चार को खारिज करते हुए एक में दण्ड की मात्रा कम की गई। इसी तरह अभियोजन स्वीकृति के एक प्रकरण में विभागीय जांच के आदेश तथा दो में अभियोजन की मनाही करते हुए विभागीय जांच के तीन प्रकरणों में दोषमुक्ति का अनुमोदन भी किया गया।




