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LPG ब्लास्ट के बाद आग से घिरी सड़क पर दौड़ी:पिता को फोन किया-कैबिन में खड़ी थी और आग लग गई;ट्रेन से आना था,बस से रवाना हुई

जयपुर LPG टैंकर ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसी युवती सहित 3 और लोगों ने बुधवार को सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। इसी के साथ पिछले चार दिन में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है।

बुधवार को जिन लोगों की जान गई उनमें 22 साल की विनिता भी है। वह इस हादसे में 70 प्रतिशत तक झुलस गई थी। सुबह 4 बजे उसकी जान चली गई। विनिता बीएड की पढ़ाई कर रही थी और साथ में टीचर के लिए कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी कर रही थी।

​20 दिसंबर को विनिता उसी बस में सवार थी, जो इस हादसे में पूरी तरह से जल गई। वह एग्जाम देने के लिए उदयपुर गई हुई थी। पिता ने बताया कि हादसे के वक्त व​ह बस के कैबिन में खड़ी थी। आग की लपटों से घिरने के बाद उसने मुझे फोन किया था और पूरी घटना बताई।

भाई बोला-उदयपुर से ट्रेन में टिकट थे, वह बस में रवाना हो गई

इस हादसे में झुलसने के बाद वि​नीता ने अपने भाई राकेश मेहरड़ा को भी कॉल किया। राकेश ने बताया कि विनीता 19 दिसंबर को जयपुर से उदयपुर गई थी। हमने आने-जाने के टि​कट ट्रेन में ही करवा रखे थे। उदयपुर में एग्जाम देने के बाद उसे 21 दिसंबर को ट्रेन से ही आना था। ट्रेन सुबह 6 बजे की थी।

लेकिन, वह कॉलेज के एग्जाम से उस दिन शाम 6 बजे ही फ्री हो गई थी। इस पर उसने घर पर कॉल कर बताया भी था कि रात को यहां रुकने से मतलब नहीं है, उसकी पढ़ाई खराब होगी। इसलिए वह अभी रवाना हो जाएगी। रात 9 बजे जब उससे बात हुई तो बताया कि वह बस से रवाना हो गई है और सुबह 6 बजे 200 फीट बाइपास उतर जाएगी।

इसी बीच सुबह फोन आया और उसने बताया कि रास्ते में ब्लास्ट हो गया था, जिससे उनकी बस जल गई। वह भी झुलस गई है। इसके बाद परिवार के लोग जयपुर के लिए रवाना हुए।

पिता को फोन किया, कहा-ब्लास्ट हो गया, मैं आग में घिर गई

विनिता के पिता रामचंद्र ने बताया कि उनकी बेटी काफी हिम्मत वाली थी। हादसा होते ही उसने मुझे फोन किया। उस समय वह झुलस चुकी थी। उसने फोन पर मुझे बताया कि 200 फीट बाइपास आने वाला था तो मैं कैबिन में खड़ी थी।

इसी दौरान मेरी आंखों के सामने ब्लास्ट हो गया। जैसे ही धमाका हुआ आग की लपटें बस में आ गई और लोग चपेट में आ गए। पिता ने बताया कि आग की लपटें फैलने के बाद उनकी बेटी बस से कूदी और सड़क पर दौड़ने लगी।

कुछ दूरी पर वह रुकी। यहां एक व्यक्ति था, जिसने मेरी बेटी से बात करवाई। पिता ने बताया कि मैं उस समय श्रीमाधोपुर था। पिता ने बताया कि विनिता 8वीं तक प्रतापगढ़ में पढ़ी थी। इसके बाद 12वीं तक सीकर में पढ़ाई की। अभी वह जयपुर के एलबीएस कॉलेज में बीएड कर रही थी।

मंगलवार तक ऑक्सीजन लेवल सही था, वह टीचर बनना चाहती थी

पिता ने बताया कि हमें उम्मीद थी कि 70 प्रतिशत तक झुलसने के बाद भी वह बच जाएगी। मंगलवार तक उसका ऑक्सीजन लेवल सही चल रहा था। परिवार के लोग भी दुआ कर रहे थे कि बेटी बच जाए।

विनिता की बड़ी बहन और उससे छोटी बहन, तीनों जयपुर रहकर पढ़ाई कर रही थी। पिता ने बताया कि वह खुद शिक्षक है। उसकी खुद की जिद थी कि मुझे शिक्षक बनना है। इसके लिए उसको पहले एसटीसी करवाई थी।

एसटीसी करवाने के बाद वह बीएड कर रही थी। उन्होंने बताया- अपने करियर को दिशा देने के लिए वह उदयपुर परीक्षा देने के लिए गई थी।

20 दिसंबर को जयपुर-अजमेर हाईवे पर हुआ था हादसा

जयपुर के अजमेर रोड पर भांकरोटा (DPS के पास) 20 दिसंबर को हुए हादसे में 4 लोग मौके पर ही जिंदा जल गए थे। 8 लोगों ने उसी दिन सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ा था। 1 मौत जयपुरिया हॉस्पिटल में हुई थी।

आग की चपेट में आकर स्लीपर बस समेत 40 गाड़ियां जल गई थी

आग इतनी तेजी से फैली थी कि 40 से ज्यादा गाड़ियां उसकी चपेट में आ गई थी। टैंकर के ठीक पीछे चल रही एक स्लीपर बस और हाईवे किनारे मौजूद पाइप फैक्ट्री भी जल गई थी। एक्सीडेंट की वजह से बस का दरवाजा एक ट्रक से चिपक गया। इस कारण उसमें सवार 34 लोगों को बाहर निकलने की जगह ही नहीं मिली। बड़ी मुश्किल से ड्राइवर वाले गेट से लोगों को बाहर निकाला गया। आग बुझने के बाद कई शवों को पोटली में डालकर अस्पताल ले जाया गया था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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