भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने मंदिर में गंगा जल छिड़ककर विवादों में घिरे पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा को दंडित किए जाने के संकेत दिए हैं।
सोमवार को जोधपुर दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए इस मुद्दे पर पार्टी का मत स्पष्ट करते हुए कहा – भाजपा सदस्य बनने की पहली शर्त यही है कि मैं किसी भी तरह की अस्पृश्यता बर्दाश्त नहीं करूंगा। लिंग, जाति, धर्म का भेदभाव नहीं करुंगा।
किसी व्यक्ति ने जो कुछ भी गलत काम किया, उस पर तत्काल कदम उठाया और निलंबित कर जवाब तलब किया। जो जवाब आया उसे अनुशासन कमेटी को सौंप दिया गया है। दंडित किया जाएगा लेकिन उससे पहले प्रक्रिया पूरी करना होती है। राठौड़ ने कहा – ‘मुझे लगता है जो गलत काम करेगा, उसे दंडित किया जाएगा।
राठौड़ ने कहा-सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाता है
राठौड़ ने कहा- जैसा कि किसी भी दल हो, किसी को भी दंडित करने से पहले सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाता है, उसके बाद निर्णय होता है। कानून में भी ऐसा ही होता है। मुझे लगता है…दंडित किया जाएगा…लेकिन मैं अध्यक्ष होने के नाते पहले ही कुछ कहूं, वो न्यायसंगत नहीं होगा।
इस बातचीत में राठौड़ ने आहूजा की ओर से दिए जवाब का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनका कहना था कि जाति को लेकर वे भेदभाव नहीं करते
बाबा साहब के नाम का कांग्रेस करती आ रही दुरुपयोग
राठौड़ ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का पिछड़ों को आगे लाने में अहम योगदान रहा है। उनकी ही तरह पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भी एकात्म मानववाद का सिद्धांत दिया। उन दोनों का यही मत रहा कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति का भी भला हो। हमारे विरोधी उनके नाम पर सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए, बाबा साहब के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं, वो उचित नहीं है।
पुजारियों के हक भाजपा ने नहीं छीने
भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मंदिर माफी की भूमि से पुजारियों के खातेदारी में नाम होने के बावजूद उन्हें भी बेदखल करने के सवाल पर राठौड़ ने कहा कि मंदिर की संपत्ति ठाकुरजी की है। वो उनकी ही रहेगी। हमने कभी पुजारियों का हक नहीं छीना है। हालांकि, ऐसे पुजारी, जिनके नाम खातेदार के रूप में दर्ज थे, उनके नाम हटाने के सवाल को राठौड़ टाल गए।

वक्फ की संपत्ति का लाभ असली जरुरतमंद को मिलेगा: शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने कहा कि देश में सर्वाधिक संपत्तियां वक्फ के पास है, लेकिन अब तक चुनिंदा लोग ही इसका फायदा उठा रहे थे। इसीलिए इस कानून में संशोधन करने की जरुरत पड़ी है। इससे असली जरुरतमंद तबके तक फायदा पहुंच पाएगा। वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग भी उसी समाज के लोगों पर किया जाएगा। इससे वो लोग जरूर चिंतित हैं, जो अब तक मनमर्जी से उसका फायदा उठा रहे थे। सनातन बोर्ड का गठन करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अधिकांश मंदिर राज्य सरकारों के अधीन देव स्थान विभाग द्वारा प्रबंधन किया जाता है। दक्षिण भारत के अधिकांश मंदिरों का प्रबंध न्यास के पास है। राज्य सरकारें अपने स्तर पर प्रबंधन कर रही है। ऐसे में उस पुराने कानून को छेड़ने का कोई औचित्य नजर नहीं आता।]






