मानसून आ चुका। बारिश से शहरों की सड़कें हलकान हैं। जगह जगह रोड धंस रहीं, खड्डे ही खड्डे बन चुके। हर बारिश में 1050 करोड़ रुपए की सड़कें बह जाती हैं। दोबारा रिपेयर पर हर साल एक शहर में मेट्रो रेल चलाने जितना खर्च आ जाता है। लेकिन अफसरों ने ड्रेनेज प्लान और सीवरेज प्लान लागू ही नहीं किए। जयपुर, जोधपुर, भिवाड़ी और भरतपुर के ड्रेनेज, सीवर प्लान बने हुए रखे हैं।
सीएम ने 14 अगस्त 2024 को, डिप्टी सीएम और जयपुर से जीते 2 मंत्रियों ने 11 माह पहले मास्टर ड्रेनेज प्लान और सीवर प्लान लागू करने के आदेश दिए थे। पिछले साल भारी बारिश से लगातार राजधानी में जलमग्न के हालात बनें थे। सीएम खुद ने जल भराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया था। लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब मानसून आते ही सड़कें तलैया बनीं तो फिर स्वायत्त शासन और यूडीएच के अफसर कह रहे, सभी शहरों से ड्रेनेज व सीवर प्लान मांगे हैं। सभी शहरों में व्यापक स्तर पर लागू करेंगे। मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कहीं पानी भराव न हों और मानसून में ड्रेनेज दुरुस्त रखने के हर संभव कार्य हों। बकौल मंत्री सभी शहरों से सीवर ड्रेनेज प्लान मांगे हैं।
34 साल में केवल प्लान बनाए, अवधिपार हुए
ड्रेनेज प्लान 1991 से बनाए जा रहे। 1991 में जयपुर का मास्टर ड्रेनेज व सीवरेज प्लान बनाया गया। 3620 करोड़ के प्लान कभी धरातल पर उतरे ही नहीं। जेडीए ने 3620 करोड़ का मास्टर ड्रेनेज का प्लान तैयार किया था। 2534 करोड़ जेडीए और 1086 करोड़ निगम रीजन पर खर्च होना था। 2016 में केंद्र की एजेंसी (एनसीआरपीबी) से लोन की फाइल चलाई गई, लेकिन फिर सरकार ने इसमें गारंटर बनने से इंकार कर दिया। प्लान अवधिपार हो गया। ऐसे प्लान 4 बार और बनाने की फाइलें चलीं।
अकेले जयपुर में हैं 65 हजार किमी सीवरेज लाइनें
जयपुर में ही ड्रेनेज प्लान बनाने के लिए 65 हजार किलोमीटर सीवरेज लाइनों को दुरुस्त करना होगा। उसके बाद ड्रेनेज लाइनें डालकर बारिश आदि के पानी की अलग निकासी का प्लान लागू करना होगा। पहले फेज में जयपुर, जोधपुर, भिवाड़ी और भरतपुर में ड्रेनेज सीवरेज प्लान लागू किया जाता है तो करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।
दूसरे चरण में इन शहरों पर फोकस
दूसरे चरण में उदयपुर, कोटा, अजमेर, अलवर सहित अन्य शहरों के प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन शहरों में सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
बारिश में बह जाती हैं 1050 करोड़ की सड़कें, ड्रेनेज प्लान के लिए मंत्रियों ने निर्देश दिए थे





