जयपुर में सरकारी जमीन पर गलत ढंग से पट्टे जारी करने के मामले में स्वायत्त शासन विभाग ने नगर निगम हेरिटेज के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। बुधवार को स्वायत्त शासन विभाग ने नगर निगम की पूर्व लैंड शाखा उपयुक्त हंसा मीणा समेत लेखक कनिष्ठ अभियंता और कनिष्ठ सहायक को सस्पेंड कर दिया है। इसके बाद अब विभाग के स्तर पर इस पूरे मामले की रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने की तैयारी की जा रही है।
बता दें कि आम जनता और स्थानीय पार्षद सुभाष व्यास द्वारा फर्जी पत्तों को लेकर नगर निगम के पूर्व कमिश्नर अरुण कुमार हसीजा को शिकायत की गई थी। इसके बाद जून महीने के अंत में फर्जी पट्टे निगम के सामने आए तो कार्रवाई तो बुधवार को जांच के बाद सस्पेंशन ऑर्डर जारी किए गए।
समझिए क्या था मामला
जयपुर नगर निगम हेरिटेज की नेहरू नगर पानी पेच में करोड़ों रुपए कीमत की जमीन के निगम ने गलत तरीके से पट्टे जारी कर दिए थे। निगम अधिकारियों ने नंबर का हेरफेर कर निगम की जमीन के निगम से ही पट्टे उठाए थे। इनमें 35 में 10 की रजिस्ट्री भी करवा ली गई थी।
जिसकी शिकायत पर निगम कमिश्नर डॉ. निधि पटेल ने एडिशनल कमिश्नर के अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था। जिसकी रिपोर्ट में अब नगर निगम के चार अधिकारियों हंसा मीणा पूर्व लैंड उपायुक्त, मनोज मीणा कनिष्ठ अभियन्ता, मुकेश मीणा लेखाकार और शंकर मीणा कनिष्ठ सहायक को सस्पेंड कर दिया गया है।
इसके साथ ही चारों अधिकारियों को सस्पेंशन टाइम में उप निदेशक (क्षेत्रीय), स्थानीय निकाय विभाग बीकानेर में नियुक्ति देने का फैसला किया गया है।

तस्वीर, सस्पेंशन ऑर्डर की है, इसमें चारों अधिकारियों के नाम लिखे हैं।
सख्त एक्शन लेंगे
स्वायत्त शासन विभाग के एडिशनल डायरेक्टर श्याम सिंह शेखावत ने कहा कि नगर निगम के अधिकारियों द्वारा की गई जांच में चार अधिकारियों की संकल्पित पाई गई है। जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस गंभीर मामले में जो भी लोग और दोषी होंगे। उनके खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाएगा।
पार्षद बोले- निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
स्थानीय पार्षद सुभाष व्यास ने कहा कि इस पूरे गड़बड़ घोटाले में सिर्फ नगर निगम के चार अधिकारी ही नहीं बल्कि, काफी और लोग भी दोषी है। जिनके संरक्षण में यह पूरा गड़बड़ घोटाला किया गया है। ऐसे में अब इनका साथ देने वाले सभी लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ताकि सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान लगाने वाले लोगों को जेल हो सके।
मेयर की OSD रह चुकीं हैं मीणा
बता दें कि नगर निगम में बतौर सचिव के पद पर ज्वाइन करने वाली हंसा मीणा मेयर कुसुम यादव की ओएसडी भी रह चुकी है। इससे पहले भी हंसा मीणा के खिलाफ लैंड शाखा में गड़बड़ी की शिकायत के बाद उनका निगम से ट्रांसफर कर दिया गया था। लेकिन मीणा कोर्ट से स्टे लेकर नगर निगम में फिर से आ गई थी।






