अखिल भारतीय एससी-एसटी एकता मंच भारत की राजस्थान प्रदेश शाखा के तत्वावधान में जयपुर के झोटवाड़ा स्थित नमन पैराडाइज,खोरा बीसल सरना डूंगर में प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।कार्यक्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं में 80% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 91 मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ-साथ समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 21 सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि राजेश गहचन्द का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश गहचन्द ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा,हमारा संगठन वर्तमान में 13 राज्यों में कार्यरत है और हमारा मुख्य उद्देश्य एससी-एसटी समाज को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना है।जब तक समाज शिक्षित नहीं होगा,तब तक उसका सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।साथ ही उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि युवाओं को आगे बढ़ने के लिए एक प्रेरणा है।

प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश वाल्मीकि की घोषणा
प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश वाल्मीकि ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि ऐसे सम्मान समारोह प्रतिवर्ष आयोजित किए जाएंगे ताकि समाज के प्रतिभावान युवाओं को उचित मंच और सम्मान मिल सके।साथ ही उन्होंने बताया कि इस वर्ष कक्षा 10वीं के 50, कक्षा 12वीं के 40 और एमबीबीएस की 1 छात्रा को सम्मानित किया गया।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर राष्ट्रीय संयोजक लालचंद राठौड़,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भंवर लाल चौहान, राष्ट्रीय संगठन महासचिव कुलदीप मेहचाना एवं खोरा बीसल सरपंच सुरेश डाबी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।लालचंद राठौड़ ने बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डाला, वहीं कुलदीप मेहचाना ने कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रदेश शाखा को बधाई एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।
“कार्यक्रम का संचालन एवं सहयोग”
कार्यक्रम का सफल संचालन चंद्रप्रकाश डाबरिया एवं विक्की गुजराती ने किया। इस आयोजन को सफल बनाने में महेंद्र जीनकवाल,कमल सारसर,कमल गोलेछा,बलराम सारसर,हंसराज डाबरिया,डबरिया सबल,निर्मल हिंगोनिया,मुकेश डबरिया,कानाराम अटल,बाबूलाल बंशीवाल,महेश कुमार रैगर (आमेर विधानसभा अध्यक्ष) सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग दिया।
“समाज को दिशा देने की पहल”
इस कार्यक्रम ने न केवल छात्रों को सम्मानित किया,बल्कि समाज के प्रति योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को भी प्रोत्साहित किया,जिससे सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के महत्व को बल मिला।






