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नव विधान – न्याय की नई पहचान प्रदर्शनी का चौथा दिन— समयबद्ध अन्वेषण एवं पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया से पीड़ित को मिल रहा त्वरित न्याय

समयबद्ध अन्वेषण एवं कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता ला रहे नए आपराधिक कानून देश एवं प्रदेश के नागरिकों के हितों की सुरक्षा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। इन आपराधिक कानूनों ने मजबूत एवं कुशल न्याय प्रणाली को विकसित किया है। आमजन को इनके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा जेईसीसी में संचालित की जा रही प्रदर्शनी आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। प्रदर्शनी में नए आपराधिक कानूनों की जानकारी प्रदर्शित की जा रही है।
घटना घटित होने से लेकर पीड़ित को न्याय मिलने की प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन आमजन के मन में कानून से जुड़ी उलझनों को आसान कर रहा है।
प्रदर्शनी के चौथे दिन गुरूवार को पुलिस कंट्रोल रूम, घटनास्थल, पुलिस थाना, फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री, अस्पताल, जिला न्यायालय, जेल अधीक्षक कार्यालय एवं हाई कोर्ट के सजीव मॉडल के माध्यम से आमजन के समक्ष नए कानूनों के तहत संपूर्ण कार्यवाही का सजीव रूपांतरण प्रस्तुत किया गया। इस सजीव रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया कि किस तरह से कंट्रोल रूम में प्राप्त होने वाली शिकायत पर पुलिस आगे की कार्यवाही करती है और कैसे ई- साक्ष्य ऐप के माध्यम से घटनास्थल की ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग एवं विभिन्न एंगल से फोटोग्राफी तथा टाइम स्टांप और जीपीएस कैप्चर एवं हैश वैल्यू जैसी तकनीकों की मदद ली जाती है और किस प्रकार CRIMAC (क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर) पोर्टल के माध्यम से विभिन्न जांच एजेंसियां अपराध और अपराधियों की जानकारी आपस में साझा करती है।
पुलिस थाने के अगले दृश्य में पात्रों के माध्यम से चित्र खोजी ऐप की जानकारी दी गई जो कि एक फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर है जिसे भारत सरकार द्वारा विकसित किया गया है एवं जिसमें एक करोड़ अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों का डेटाबेस है, जिसके द्वारा संदिग्ध व्यक्ति की फोटो सॉफ्टवेयर से चेक की जा सकती है।
इसी प्रकार NAFIS (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आईडेंटिफिकेशन सिस्टम) जो की एनसीईआरटी की परियोजना है जिसके तहत सभी जिलों राज्यों और इंफोर्समेंट एजेंसियों को अपराधी फिंगरप्रिंट का राष्ट्रीय संग्रह स्थापित कर एक महत्वपूर्ण उपकरण उपलब्ध कराया गया है। यह फिंगर प्रिंट पहचान प्रणाली से इंटीग्रेटेड कर दी गई है जिसमें एक करोड़ से ज्यादा अपराधियों का फिंगरप्रिंट डेटाबेस शामिल है। इसके साथ ही गिरफ्तार होने वाले प्रत्येक व्यक्ति का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड भी उपलब्ध है।
प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि किस प्रकार नए कानून आने के बाद फॉरेंसिक की क्षमताओं का भी विकास और विस्तार हुआ है जिसके कारण पहले की तरह एफएसएल रिपोर्ट महीनों पेंडिंग नहीं रहती है। आमजन को यह विश्वास दिलाया गया कि नए कानून लागू होने के बाद पूरी न्याय व्यवस्था पीड़ित केंद्रित हो गई है। जिससे कि आमजन का न्याय प्रणाली पर भरोसा और अधिक बढ़ा है।
किसी भी केस की सारी पत्रावली ऑनलाइन होने से प्रक्रिया सुगम हुई है। चार्ज शीट चेक कर ओपिनियन ई प्रॉसीक्यूशन के माध्यम से अपलोड होने लगा है जिससे इस प्रक्रिया को आसान करने के साथ ही समय की भी बचत हो रही है। ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होने से अब आरोपी के भागने का डर नहीं रहता। इसके साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए अधिक पुलिस बल की जरूरत, सरकार का पैसा, समय एवं संसाधनों की बचत होती है।
प्रदर्शनी में विधिक शिक्षा से जुड़े विद्यार्थी, शिक्षक, विधिवेत्ता, कॉलेज छात्र— छात्राएं पहुंचे। आज विशेष सत्र में कानूनविदों के साथ नए कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन, सजा प्रतिशत में अभिवृद्धि, अधिवक्ताओं ने न्यायपालिका की भूमिका पर विचार साझा किए।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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