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फैसले से पहले ज्यूडिशियल मेंबर दलाल को ड्राफ्ट भेजती थी:जयपुर में CBI का खुलासा, एडवोकेट सहित 3 को गिरफ्तार किया, 1.15 करोड़ कैश बरामद

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जयपुर के आयकर अपील ट्रिब्यूनल (ITAT) में बड़े घूसकांड का खुलासा किया है। ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया और कोटा निवासी मुजम्मिल (अपीलेंट) को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान कुल 1.15 करोड़ रुपए बरामद किए गए हैं।

29 नवंबर तक रिमांड पर भेजा बुधवार शाम 5 बजे तीनों आरोपियों को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया। सीता लक्ष्मी कोर्ट में रो पड़ी। उसके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। उनके वकीलों ने स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए घर से खाना देने की इजाजत मांगी।सीबीआई ने कहा कि हम पूरा ध्यान रखेंगे। कोर्ट ने तीनों को 29 नवंबर तक रिमांड में भेज दिया है।

आरोपी आईटीएटी की ज्युडीशियल मेंबर एस सीतालक्ष्मी 2021 से विभाग में कार्यरत है
आरोपी आईटीएटी की ज्युडीशियल मेंबर एस सीतालक्ष्मी 2021 से विभाग में कार्यरत है

10 दिन पहले ट्रिब्यूनल में घूस लेने के पुख्ता सबूत मिले थे सीबीआई को 3 माह पहले शिकायत मिली थी। 10 दिन पहले ट्रिब्यूनल में घूस लेने के पुख्ता सबूत मिले थे। जांच के बाद सीबीआई ने यह केस 25 नवंबर को आरोपी वकील, आईटीएटी जयपुर के मेंबर और असिस्टेंट रजिस्ट्रार सहित अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया। आरोपी राजेंद्र सिसोदिया (वकील), डॉ. एस. सीतालक्ष्मी (ज्यूडिशियल मेंबर) और मुजम्मिल (अपीलेंट) को गिरफ्तार किया गया है।

ITAT जयपुर में हुए घोटाले में गिरफ्तार तीसरा शख्स मुज्जम्मिल है। मुज्जम्मिल अपीलकर्ता है और उसी ने रिश्वत की पूरी डील सेट की थी। ये वही शख्स है जिसका केस चल रहा था और जिसने पैसे का इंतजाम किया। सीतालक्ष्मी चेन्नई निवासी है और वर्तमान में सी स्कीम में किराए के मकान में रहती है।

सीबीआई को आशंका है कि सीता लक्ष्मी से मिली 30 लाख की नकदी बुधवार को दिए गए फैसले के संबंध में हो सकते हैं। सीबीआई का कहना है कि एडवोकेट राजेंद्र सिंह के फोन में आयकर से जुड़े फैसलों का ड्राफ्ट भी मिला है।

ट्रिब्यूनल के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार केसी मीना से जब बातचीत के लिए भास्कर टीम सी-स्कीम स्थित ट्रिब्यूनल ऑफिस पहुंची तो वह अपने चैंबर से नदारद मिले। स्टाफ से जब उनके बारे में जानकारी लेनी चाही ओर उनका नंबर पूछा गया तो कोई भी बोलने को तैयार नहीं।
ट्रिब्यूनल के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार केसी मीना से जब बातचीत के लिए भास्कर टीम सी-स्कीम स्थित ट्रिब्यूनल ऑफिस पहुंची तो वह अपने चैंबर से नदारद मिले। स्टाफ से जब उनके बारे में जानकारी लेनी चाही ओर उनका नंबर पूछा गया तो कोई भी बोलने को तैयार नहीं।

कैसे खुला घूस का नेटवर्क

  • 25 नवंबर रात को सीबीआई ने कोटा में मुजम्मिल से 5.50 लाख रुपए लेते हुए वकील राजेंद्र सिंह को रंगे हाथों पकड़ा। यह रकम एक अपीलकर्ता ने हवाला चैनल के ज़रिए पहुंचाई थी
  • मुजम्मिल की निशानदेही पर 26 नवंबर को ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी के घर व सरकारी कार की तलाशी ली गई। कार से 30 लाख रुपए कैश मिला।
  • दलाल राजेंद्र सिंह के घर से 80 लाख रुपए कैश और तमाम दस्तावेज बरामद हुए।
  • सीबीआई के अनुसार, राजेंद्र सिंह के फोन से आयकर मामलों के फैसलों के ड्राफ्ट मिले हैं।
26 नवंबर को सीबीआई ने ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी और एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया को गिरफ्तार किया था।
26 नवंबर को सीबीआई ने ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी और एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया को गिरफ्तार किया था।

जयपुर, कोटा सहित कई अन्य शहरों में छापेमारी 26 नवंबर को सीबीआई की टीमों ने कोटा जयपुर सहित कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। इस मामले में जयपुर की टीम ने कोटा में भी एक कारोबारी समूह के तीन पार्टनर के यहां दस्तावेजों की जांच की। जयपुर में सी-स्कीम, मालवीय नगर और जगतपुरा में छापे की कार्रवाई कर दस्तावेज जब्त किए गए। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों पर भी सीबीआई ने छापेमारी की। इस दौरान कैश, बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड, संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए थे।

कोटा निवासी मुजम्मिल को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।
कोटा निवासी मुजम्मिल को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।

यह है व्यवस्था करदाताओं के मामले में प्रारंभिक तौर पर आयकर अधिकारी आदेश देता है। इस आदेश को करदाता आयकर आयुक्त के यहां चुनौती देते हैं। इसके बाद आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने चुनौती दी जा सकती है। अपीलेट ट्रिब्यूनल में न्यायिक सदस्य सहित दो सदस्यों की बेंच सुनवाई करती है। न्यायिक सदस्य की नियुक्ति केन्द्र सरकार के यहां से होती है। आयकर विवाद के मामलों में अपीलेट ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम होता है।

सीबीआई की गिरफ्त में आने के बाद बुधवार को ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी कुछ इस तरह मुंह छुपाती रही।
सीबीआई की गिरफ्त में आने के बाद बुधवार को ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी कुछ इस तरह मुंह छुपाती रही।

कैसे होता था खेल? जांच में सामने आया कि ज्यूडिशियल मेंबर सीता लक्ष्मी ‘कच्चा आदेश’ (ड्राफ्ट) फैसला सुनाने से पहले एडवोकेट राजेंद्र को भेजती थीं। पैसे मिलने के बाद ही अंतिम आदेश तैयार किया जाता था। इसमें ट्रिब्यूनल के असिस्टेंट रजिस्ट्रार केसी मीणा की संलिप्तता की भी आशंका है।

सीबीआई की तेज कार्रवाई

  • तीन महीने पहले मिली शिकायत के बाद सीबीआई ने 10 दिन पहले पुख्ता सबूत मिलने पर 25 नवंबर को केस दर्ज किया।
  • जयपुर, कोटा सहित कई शहरों में एक साथ छापेमारी की गई।
  • कैश, बैंक लेनदेन के रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए।
Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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