पाटन. इलाके के कोला की नांगल स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल को रैया का बास के राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में मर्ज करने के आदेश का ग्रामीणों ने विरोध किया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने मुख्य ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें स्कूल को कोला की नांगल में ही यथावत रखने की मांग की गई है।
शिक्षा निदेशालय ने 29 दिसंबर को एक आदेश जारी किया था, जिसमें कोला की नांगल स्कूल के भवन को जर्जर बताते हुए इसे रैया का बास के स्कूल में विलय करने का निर्देश दिया गया था। वर्तमान में कोला की नांगल के इस स्कूल में 152 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने इस आदेश का विरोध करते हुए दावा किया है कि स्कूल का भवन जर्जर नहीं है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पहले से ही सात कमरे सुरक्षित स्थिति में हैं और हाल ही में जन सहयोग से तीन अन्य कमरों की मरम्मत भी करवाई गई है।
ग्रामीणों ने विलय के बाद बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कोला की नांगल से रैया का बास तक की दूरी लगभग 3 किलोमीटर है और यह रास्ता जंगल से होकर गुजरता है। ऐसे सुनसान रास्ते में छोटे बच्चों के साथ किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोला की नांगल स्कूल को यथावत नहीं रखा गया, तो वे अपने बच्चों को रैया का बास के स्कूल में नहीं भेजेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे इसके लिए आंदोलन करेंगे।
इस मामले पर सीबीईओ भंवर सिंह और एसीबीईओ महेश मीणा ने ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों की बात को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और स्कूल को यथावत रखने का आश्वासन दिया है।





