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परंपरा सहेजें भविष्य गढ़ें माहेश्वरी समाज नहीं, जीवंत संस्कृति है – राज्यपाल बागडे

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रविवार को जोधपुर में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय माहेश्वरी महाअधिवेशन एवं माहेश्वरी महाकुंभ में सहभागिता करते हुए कहा कि माहेश्वरी समाज केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सशक्त स्वरूप है।

राज्यपाल बागडे ने समाज की प्रतिभाओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि वही समाज प्रगति करता है, जो अपनी प्रतिभाओं को सम्मान और अवसर प्रदान करता है। उन्होंने समाज की एकता, समान संस्कृति, मूल्य और परंपराओं को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल भू-भाग नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है, जो विभिन्न समाजों के सामूहिक योगदान से सशक्त होता है। इस दृष्टि से माहेश्वरी समाज भारतीय संस्कृति की निरंतर प्रवाहमान धारा है।

राज्यपाल ने माहेश्वरी समाज की ऐतिहासिक उत्पत्ति, उद्यमिता परंपरा और राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि “जहाँ बैलगाड़ी नहीं पहुँचती, वहाँ मारवाड़ी पहुँचते हैं”—और इस परंपरा में माहेश्वरी समाज की भूमिका अग्रणी रही है। उन्होंने उद्योग, व्यापार, स्टार्ट-अप, महिला सशक्तिकरण, सेवा और समाज कल्याण के क्षेत्र में अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

राज्यपाल ने कहा कि वही समाज आगे बढ़ता है, जो परंपरा को स्मरण रखते हुए भविष्य के प्रति सजग रहता है। उन्होंने समाज से शिक्षा, कौशल विकास और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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