बड़ी कंपनियों में काम दिलाने का झांसा देकर 4 आरोपियों ने पीड़ित कानाराम के नाम से फर्म रजिस्टर्ड करवाई। उसी फर्म की आड में आरोपियों ने 90 करोड़ के फर्जी जीएसटी के ई-बिल भी काट दिए। पीड़ित कानाराम को फर्जीवाड़े का पता तब चला, जब उसके नाम से जीएसटी ऑफिस से नोटिस आया। आखिरकार मामला विवेक विहार थाना पुलिस तक पहुंचा।
फर्जीवाड़े में निलेश हर्ष, आनंद व्यास, फिरोज खान और प्रफुल्ल के शामिल होने का आरोप है। बावजूद इसके अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया है। पीड़ित कानाराम रेलवे में छोटे काम लेता था। तब आरोपियों ने विश्वास में लेकर फर्म बनाने के नाम पर फर्जीवाड़ा कर दिया। इसी फर्जीवाड़े के चलते उसका रेलवे में 50 लाख रुपए का बॉन्ड भी अटका हुआ है।
पिछले साल 18 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के आदेश दिए थे। सरकारी अधिवक्ता की ओर से कोर्ट मामले की जांच जल्द ही पूरी करने के लिए आश्वस्त किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अधीनस्थ कोर्ट ने भी गत 12 अगस्त को इस मामले को गंभीरता से लिया था। एसीजेएम ने विवेक विहार थाना पुलिस को निर्देश दिए कि वे मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
कानाराम रेलवे में ठेकेदारी का काम करता था। उसकी साल 2019-20 में निलेश हर्ष से मुलाकात हुई। उसने कानाराम को रेलवे में बड़े काम दिलाने के लिए बड़ी फर्म होने का कहकर रजिस्टर्ड फर्म बनाने का झांसा दिया। इसके बाद कानाराम के नाम और दस्तावेजों से जीके ट्रांसपोर्ट फर्म बनाई। उसे रेलवे का काम भी दिलाया। जिसका आज तक कानाराम को भुगतान नहीं हुआ।
आरोपियों ने कानाराम का ऑफिस भी जसवंत सराय में अपने मिलने वाले के यहां होना बताया। आरोपी कानाराम के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाकर कई विभागों में काम लेने का झांसा देकर एप्लीकेशन फॉर्म पर उसके साइन करवाते। बाद में आरोपियों ने ऑफिस का पता बदलकर कुड़ी भगतासनी का 14 एफ 14 कर दिया। परिवादी ने इस्तगासे के जरिए विवेक विहार थाने में मामला दर्ज करवाया था। जिसकी जांच थानाधिकारी दिलीप खदाव को सौंपी गई
साल 2021 में आरोपियों ने परिवादी कानाराम को रिलायंस कंपनी में वेंडर बनाने का झांसा देकर फिर से साइन करवाए। मगर आरोपियों ने कानाराम को किसी तरह का वेंडर का लाइसेंस नहीं दिलाया। बल्कि वेंडर लाइसेंस के नाम पर 1 लाख रुपए अलग-अलग मदों में प्राप्त कर लिए। हैरानी तो तब हुई जब कानाराम के मोबाइल पर जीएसटी विभाग का नोटिस आया। जिसमें उसके पैनकार्ड और फर्म के नाम से फर्जी जीएसटी के करीब 90 करोड़ के बिल काटकर फर्जीवाड़ा करना सामने आया।
“विवेक विहार थाने में 90 करोड़ के जीएसटी के फर्जी ई-बिल का मामला सामने आया था। इस मामले की फाइल मंगवाकर देखी। कुछ पॉइंट बनाकर दिए हैं। जिन पर एसएचओ को जांच करनी है। परिवादी को बुलाकर उसका पक्ष भी सुना था।” -आनंद सिंह राजपुरोहित, एसीपी (बोरानाडा)





