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खाटूश्यामजी मंदिर में आस्था के साथ संवेदनशीलता का संगम

सीकर जिले के विश्वप्रसिद्ध खाटूश्यामजी फाल्गुनी लक्खी मेले में उमड़ रही अपार भीड़ के बीच राजस्थान पुलिस ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी श्रद्धालु, विशेषकर दिव्यांगजन, अपने आराध्य के दर्शन से वंचित न रहे। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की मंशाओं के अनुरूप मेले में दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

सीकर पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत ने बताया कि पार्किंग स्थल पर पहुंचने वाले दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए पुलिस द्वारा विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है। यह वाहन उन्हें सीधे दर्शन केंद्र तक पहुंचाता है। वहां व्हीलचेयर उपलब्ध कराकर पुलिसकर्मी स्वयं उन्हें सम्मानपूर्वक और सुरक्षित तरीके से बाबा श्याम के दर्शन करवाते हैं। पिछले चार दिनों में दर्जनों श्रद्धालुओं को इस प्रकार की सेवाएं दी गयी है।

हर भक्त तक पहुंचे बाबा का आशीर्वाद

एसपी नूनावत ने कहा कि खाटूश्यामजी के धाम आने वाला हर श्रद्धालु हमारे लिए परिवार का सदस्य है। विशेष रूप से दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं की सेवा करना हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि श्रद्धा का विषय है। राजस्थान पुलिस का प्रयास है कि आस्था के इस महापर्व में किसी को भी असहाय महसूस न होने दिया जाए।
उनके अनुसार, मेले की विशालता को देखते हुए पुलिस बल को संवेदनशील व्यवहार के निर्देश दिए गए हैं, ताकि व्यवस्था के साथ-साथ आत्मीयता भी बनी रहे।

सहायता केंद्रों से मिल रहा है त्वरित मार्गदर्शन

पुलिस उपाधीक्षक आनंद राव ने बताया कि मेले क्षेत्र में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को मार्ग की जानकारी सहजता से मिल सके। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर श्रद्धालु निकटतम सहायता केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं, जहां पुलिसकर्मी तत्परता से मदद प्रदान कर रहे हैं।

आपातकालीन सेवाएं हर समय उपलब्ध
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं—
📞 पुलिस हेल्पलाइन: 112
📞 पुलिस सहायता: 9667600788
एम्बुलेंस सेवा: 108

आस्था के मेले में सेवा का संदेश
फाल्गुनी लक्खी मेले में जहां एक ओर “श्याम नाम” की गूंज है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान पुलिस की सेवा भावना श्रद्धालुओं के मन में विश्वास जगा रही है। भीड़ के इस महासागर में जब कोई दिव्यांग भक्त मुस्कुराते हुए अपने आराध्य के दर्शन कर लौटता है, तो वह केवल एक व्यवस्था की सफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की विजय भी होती है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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