अलवर निवासी एक पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा कि उसकी पत्नी का अपने जीजा के साथ अवैध संबंध हैं। पत्नी ने अपनी पहचान छिपाते हुए एक बच्चे को जन्म दिया है और बच्चे को अवैध हिरासत में रखा हुआ है।
याचिका में बच्चे की जान को खतरा बताते हुए उसकी सुरक्षा के लिए गृह सचिव, एडीजी, ह्युमन ट्रैफिकिंग, एसपी अलवर और संबंधित थानाधिकारी को निर्देश देने की गुहार की गई।
इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस समीर जैन की कोर्ट ने कहा कि याचिका में ऐसा कोई तथ्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि बच्चा अवैध हिरासत में है।
वहीं अगर बच्चा अपनी मां और जैविक पिता के साथ है और याचिकाकर्ता स्वंय मान रहा है कि बच्चा उसका नहीं है तो फिर अवैध हिरासत का मामला नहीं बनता हैं।
कोर्ट ने कहा कि याचिका कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के इरादे से दायर की गई हैं। ऐसे में यह हर्जाने के साथ खारिज करने योग्य हैं। अदालत ने पति पर 50 हजार की कोस्ट लगाई।
पति ने खुद माना बच्चा उसका नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति ने हाईकोर्ट से पहले अलवर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-3 के सामने परिवाद दायर कर बच्चे की बरामदगी का प्रार्थना-पत्र लगाया था। परिवाद में पति ने कहा था कि उसकी पत्नी मई 2024 से अपनी बहन और जीजा के साथ रह रही हैं।
पति ने पत्नी पर जीजा के साथ अवैध संबंध होने का आरोप भी लगाया। ये भी कहा कि पत्नी ने अवैध संबंध को लेकर अपनी पहचान छिपाते हुए हॉस्पिटल में एक बच्चे को जन्म दिया हैं। ऐसे में पति खुद मान रहा है कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं हैं। इस पर अलवर कोर्ट ने पति का प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया था।
जांच रिपोर्ट में बच्चे के जन्म पर संदेह
कोर्ट ने कहा- मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने दो जांच रिपोर्ट सब्मिट की लेकिन दोनों रिपोर्ट से बच्चे के जन्म पर संदेह हैं।
वहीं याचिकाकर्ता के वकील प्रकाश ठाकुरिया ने कहा कि पुलिस ने अपनी पहली रिपोर्ट में कहा कि महिला ने किसी भी बच्चे को जन्म देने से इनकार किया हैं लेकिन पड़ौसियों ने बच्चा पैदा होने की बात कहीं हैं।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस को साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए, जिसके बाद पुलिस ने दूसरी रिपोर्ट में माना कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने दूसरे नाम से हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म दिया हैं। लेकिन पत्नी कह रही है कि उसने किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया। फिर हॉस्पिटल रिकोर्ड में पैदा हुआ तो बच्चा कहां गया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने हमारे तथ्यों को ठीक तरह से नहीं समझा है, ऐसे में हम मामले की अपील सुप्रीम कोर्ट में करेंगे।






