राजस्थान में इस बार फरवरी की तरह मार्च में भी तापमान कंट्रोल में रहा। शुरुआती सप्ताह में बारिश-ओलावृष्टि से सर्दी बढ़ी। हिल स्टेशन माउंट आबू समेत गंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़ के एरिया में पहली बार मार्च में बर्फ जमी दिखाई दी। कोटा, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर में 12 साल में सबसे कम तापमान इस सीजन में रिकॉर्ड हुआ।
पश्चिमी जिले जहां इस समय तक (23 मार्च तक) तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वहां अब तक (23 मार्च तक) तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के नंबर तक नहीं पहुंचा। मौसम केन्द्र नई दिल्ली ने इस बार अप्रैल के पहले सप्ताह तक तापमान सामान्य रहने और पश्चिमी जिलों में हीटवेव का असर कम रहने की संभावना जताई है।
इसलिए कंट्रोल में रहा तापमान

मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि इस बार मार्च की शुरुआत में दो बड़े एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आए। इस सिस्टम के असर से उत्तर भारत में जबरदस्त बर्फबारी हुई। जबकि मैदानी राज्यों हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश-ओलावृष्टि हुई। इससे उत्तर-पूर्वी हवाओं में ठंडक रही। मार्च के पहले सप्ताह में तापमान माइनस में चला गया। उत्तरी राजस्थान के जिलों में बर्फ जम गई, जो पहली बार देखने को मिली। हिल स्टेशन माउंट आबू में पारा माइनस 2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।रेगिस्तानी जिलों में रही ठंडक
बारिश-ओलावृष्टि के कारण रेगिस्तानी जिलों में भी इस बार तापमान नीचे चला गया। जोधपुर में 11 साल में सबसे कम तापमान दर्ज हुआ। यहां साल 2012 में 10 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ था, लेकिन इस बार 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इसी तरह जैसलमेर 12 साल बाद सबसे ठंड रहा, यहां न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस और बाड़मेर में 12 साल में सबसे कम तापमान इस बार 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। कोटा में भी 12 साल में इस बार न्यूनतम तापमान सबसे कम दर्ज हुआ।

बिजली गिरने से हुई थी चार की मौत
राजस्थान में मार्च की शुरुआत ओलावृष्टि और बारिश से हुई। 1 मार्च को टोंक जिले की पीपलू पंचायत समिति कार्यालय पर आकाशीय बिजली गिरने से चार कर्मचारी अचेत हो गए। बिजली मीटर के तार टूट गए थे। 2 मार्च को राजस्थान के अलग-अलग शहरों में बारिश, ओलावृष्टि हुई। अजमेर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, दौसा में अन्य जिलों में ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ। वहीं जिलों में अलग-अलग बिजली गिरने के हादसों में 6 की मौत हो गई थी।





