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राजस्थान की महिला उद्यमियों को मिलेगा नया आयाम:आर्च कॉलेज और राजीविका के बीच हुई महत्वपूर्ण साझेदारी, हस्तनिर्मित उत्पादों को मिलेगी नई पहचान

राजस्थान की महिला कारीगरों के हस्तनिर्मित उत्पादों को नई पहचान देने और उनके व्यवसाय को डिजाइन और मार्केटिंग के जरिए सशक्त बनाने के लिए आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस ने राजीविका के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को आधुनिक बाजार तक पहुंचाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

इस अवसर पर राजीविका की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर नीरू मीणा ने छात्रों से संवाद किया और ‘राज सखी’ पहल के तहत महिलाओं को दिए जा रहे अवसरों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस पहल से हजारों महिलाएं बाजार से जुड़कर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं।

इस अवसर पर राजीविका की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर नीरू मीणा ने छात्रों से संवाद किया।
इस अवसर पर राजीविका की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर नीरू मीणा ने छात्रों से संवाद किया।

डिजाइन और मार्केटिंग से मिलेगा नया बाजार आर्च कॉलेज और राजीविका की इस साझेदारी के तहत महिलाओं के उत्पादों को नवाचार और डिजाइन-आधारित समाधान दिए जाएंगे। उनकी बिक्री बढ़ाने और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। छात्रों को मार्केटिंग, पैकेजिंग और सोशल मीडिया के जरिए महिला कारीगरों को सशक्त बनाने का अवसर मिलेगा।

छात्रों को मार्केटिंग, पैकेजिंग और सोशल मीडिया के जरिए महिला कारीगरों को सशक्त बनाने का अवसर मिलेगा।
छात्रों को मार्केटिंग, पैकेजिंग और सोशल मीडिया के जरिए महिला कारीगरों को सशक्त बनाने का अवसर मिलेगा।

आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस की संस्थापक एवं निदेशक अर्चना सुराना ने इस पहल को लेकर कहा कि हम हमेशा से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत रहे हैं। राजीविका के साथ यह सहयोग उन महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, जो पारंपरिक कला और हस्तशिल्प में निपुण हैं, लेकिन आधुनिक बाजार तक नहीं पहुंच पा रही हैं। हमारा लक्ष्य डिजाइन और ब्रांडिंग के माध्यम से उनके उत्पादों को नई पहचान देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

आर्च कॉलेज पहले भी चूरू जिले के ताल छापर की महिलाओं के साथ सतत डिजाइन लक्ष्यों पर काम कर चुका है। इस नई साझेदारी के तहत छात्र सीधे ग्रामीण महिलाओं के साथ काम करेंगे। उन्हें ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग के गुर सिखाए जाएंगे। उनके हस्तनिर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश की जाएगी।

यह साझेदारी राजस्थान में महिला उद्यमशीलता, नवाचार और सतत विकास को नया आयाम देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति सशक्त होगी, बल्कि राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को भी बढ़ावा मिलेगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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