भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में संचालित ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ कार्यक्रम को जिला प्रशासन ने केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए दस्तावेज सुरक्षित करने का एक महाअभियान बना दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में चल रहे इस अभियान में शिक्षण संस्थाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों की भागीदारी ने इसे एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।
2025 का पंजीकरण: आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘अस्तित्व का दस्तावेज’
जिला प्रशासन ने आमजन को जागरूक करते हुए इस अभियान के दूरगामी और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया है। जिस प्रकार आज हम अपनी पहचान और नागरिकता के प्रमाण हेतु अपने पूर्वजों के वर्ष 2002 या उससे पूर्व के अभिलेख खोजते हैं, ठीक उसी प्रकार आने वाले दशकों में हमारी भावी पीढ़ियां वर्ष 2025 के इन दस्तावेजों को आधार बनाएंगी। प्रशासन ने संदेश दिया है कि यदि आज किसी कारणवश हमारा नाम 2025 की मतदाता सूची और एसआईआर रिकॉर्ड में दर्ज होने से वंचित रह जाता है, तो भविष्य में हमारी नस्लों को अपनी पहचान सिद्ध करने में गंभीर प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अतः इसे केवल एक ‘वोट’ न समझकर, अपने परिवार के ‘अस्तित्व के दस्तावेज’ के रूप में देखें। प्रशासन ने अपील की है कि गांव, शहर, गली-मोहल्ले और रिश्तेदारी में एक भी व्यक्ति ऐसा न बचे, जिसका एसआईआर फॉर्म जमा न हुआ हो।
टीकाकरण के साथ राष्ट्रीय दायित्व: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रियता
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अनुकरणीय पहल की है। गुरुवार को कार्यकर्ताओं ने अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के साथ-साथ एसआईआर जागरूकता को भी जोड़ा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर और टीकाकरण सत्रों के दौरान महिलाओं से संपर्क किया। उन्होंने मौके पर ही नागरिकों से गणना प्रपत्र भरवाए और संकलित किए, ताकि स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ नागरिक अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

मोरोली में विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला और रंगोली से दिया संदेश
शिक्षण संस्थाओं में स्वीप गतिविधियों के अंतर्गत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मोरोली में जागरूकता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। यहाँ विद्यार्थियों ने अनुशासित ढंग से खड़े होकर ‘SIR’ आकृति की एक भव्य मानव श्रृंखला बनाई। साथ ही, छात्राओं ने आकर्षक रंगोली बनाकर विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम की सक्रियता का संदेश दिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों के माध्यम से उनके अभिभावकों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु प्रेरित करना था।
स्थानीय बोली बनी संवाहक: सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य की ‘मेवाती’ कविताओं ने जगाई अलख
जागरूकता अभियान को स्थानीय संस्कृति की मिठास देते हुए, कैथवाड़ा निवासी और माध्यमिक शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य श्री नानक चंद जी शर्मा ने एक सराहनीय प्रयास किया है। श्री शर्मा अपनी स्थानीय ‘मेवाती’ भाषा में रचित कविताओं के माध्यम से क्षेत्र के नागरिकों को जागरूक कर रहे हैं। उनकी स्थानीय बोली का प्रभाव यह है कि ग्रामीण, विशेषकर बुजुर्ग और महिलाएं, एसआईआर अभियान की जटिलताओं को सरलता से समझ रहे हैं। श्री शर्मा अपनी रचनाओं के जरिए बता रहे हैं कि लोकतंत्र में सहभागिता क्यों आवश्यक है। जिला प्रशासन ने इस रचनात्मक जन-सहभागिता की प्रशंसा की है।
जिला प्रशासन का आह्वान
जिला निर्वाचन कार्यालय ने सभी स्वयंसेवी संस्थाओं, प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से आह्वान किया है कि वे एक-दूसरे की मदद करें और जागरूकता फैलाएं, ताकि 2025 का यह रिकॉर्ड भविष्य के लिए एक सशक्त दस्तावेज बन सके।






