पुरी, ओडिशा में आयोजित 21 वें अखिल भारतीय अधिवेशन के आह्वान पर भारतीय मज़दूर संघ (BMS) 25 फरवरी 2026 को पूरे देश में “विरोध दिवस मनाएगा। इस दिन बीएमएस की सभी इकाइयाँ जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करेंगी, ताकि केंद्र एवं राज्य सरकारों पर विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों के श्रमिकों की लंबित समस्याओं के समाधान हेतु दबाव बनाया जा सके।
बीएमएस ने समय-समय पर सरकार के समक्ष अनेक ज्वलंत मुद्दे उठाए हैं, किंतु अब तक उनकी ओर से अपेक्षित सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
लाखों मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता आज भी अत्यंत अल्प मानदेय पर कार्य कर रही हैं। पाँच दशकों की सेवा के बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को केवल ‘योजना कर्मी’ माना जाता है. जबकि उनसे प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है और लगातार नई जिम्मेदारियों सौंपी जा रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा मानदेय वृद्धि के प्रति अनिच्छा दिखाई जा रही है।
आठ राज्यों में राष्ट्रीय वस्त्र निगम (NTC) की मिलों के श्रमिकों को महामारी के बाद से केवल 50% वेतन मिल रहा है और पिछले दस महीनों से वेतन बकाया है। रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) के कर्मचारियों को पिछले 32 महीनों से वेतन नहीं मिला है। देशभर के विद्युत कर्मचारी डिस्कॉम को सरकारी क्षेत्र में बनाए रखने और निजीकरण का विरोध करने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन: 1,000 आज भी अपरिवर्तित है, जिससे लाखों पेंशनभोगियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक कर्मचारी भी पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं।
इन गंभीर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बीएमएस की इकाइयाँ देशभर में धरना, प्रदर्शन, रैली, गेट मीटिंग, काली पट्टी धारण करने तथा माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री और संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित करेंगी।
प्रमुख माँगेंः
◼️श्रम कानूनों का सभी क्षेत्रों एवं श्रमिक वर्गों में बिना किसी अपवाद के सख्ती से और सार्वभौमिक रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए, ‘अंत्योदय’ की भावना के अनुरूप।
◼️औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता, 2020 में श्रमिकों की चिंताओं का समाधान किया जाए।
◼️भारतीय श्रम सम्मेलन को तत्काल बुलाया जाए तथा विभिन्न त्रिपक्षीय समितियों का पुनर्गठन कर उन्हें नियमित, प्रभावी एवं सार्थक रूप से संचालित किया जाए।
◼️ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन : 1,000 से बढ़ाकर 7,500 प्रतिमाह की जाए, साथ ही महंगाई राहत प्रदान की जाए तथा आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए।
◼️ईएसआई और ईपीएफ की कवरेज सीमा बढ़ाकर अधिकाधिक श्रमिकों को लाभान्वित किया जाए। ईएसआईसी की वेतन सीमा : 21,000 से बढ़ाकर 42,000 तथा वीजीपीएफ की सीमा :15,000 से बढ़ाकर 30,000 की जाए।
◼️भुगतान बोनस अधिनियम, 1965 के अंतर्गत बोनस पात्रता की सीमा वर्तमान वेतन स्तर के अनुरूप बढ़ाई जाए।
◼️विद्युत क्षेत्र से संबंधित मुद्दों पर सभी राज्यों में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 133 के अनुसार त्रिपक्षीय समझौतों को तत्काल लागू किया जाए, जिससे कर्मचारियों की सेवा शर्ते, पेंशन लाभ और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
◼️संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 में निहित सिद्धांतों के अनुरूप योजना कर्मियों और संविदा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।
◼️सामान्य भर्ती पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाए तथा रोजगार की गारंटी और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जिससे असुरक्षा और अनिश्चितता समाप्त हो।
👉भारतीय मजदूर संघ केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह करता है कि वे श्रमिकों के हित और राष्ट्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए इन लंबित माँगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लें।👈






