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जयपुर विधानसभा:सदन में 22 मिनट तक गूंजा बंदरों का आतंक, मंत्री बोले-जंगलों में मानवीय दखल बढ़ी, भोजन की कमी

विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बंदरों के आतंक पर जमकर चर्चा हुई। बहस के दौरान हल्ला भी हुआ और टोका-टाकी भी। मंत्री का लंबा वक्तव्य आया और स्पीकर ने ध्यानाकर्षण लगाने वाले विधायक पर बाहर जाने को लेकर आपत्ति भी जताई। आमतौर पर अधिकतम 15 मिनट में प्रस्ताव और मंत्री का जवाब आ जाता है, लेकिन बंदरों के आतंक पर 22 मिनट तक चर्चा चलती रही।

शाहपुरा विधायक मनीष यादव ने अपने क्षेत्र में बंदरों के आतंक पर प्रस्ताव लगाया था। उनका नाम पुकारे जाने तक बीकानेर में बालिका की हत्या को लेकर हंगामा चल रहा था और कांग्रेस के सदस्यों ने वॉकआउट कहते हुए सदन से बाहर जाना शुरू कर दिया था। इसी दौरान जैसे ही स्पीकर ने नाम पुकारा तो मनीष यादव ऊहापोह की स्थिति में बाहर की ओर जाने लगे तो स्पीकर वासुदेव देवनानी नाराज हुए।

वे रुके और अपनी बात पूरी कर सदन के गेट तक पहुंच फिर लौटे। इस पर स्पीकर ने फटकार लगाते कहा कि ऐसे मंत्री जवाब नहीं देंगे, आपका ही प्रस्ताव है आप बाहर जा रहे हैं। देवनानी ने मनीष को इसके लिए चेतावनी भी दी। यह बर्दाश्त नहीं करूंगा। बोले- मैंने नाम पुकारा और आप बाहर चले गए, ऐसे जवाब नहीं आता। आप दोनों काम एक साथ करना चाह रहे हैं।

4200 लोगों के टीके लगे, 90% बंदरों के काटने से विधायक मनीष यादव ने सदन को बताया- 2025 में शाहपुरा क्षेत्र में लगभग 4200 लोगों को रेबीज के टीके लगाए गए, जिनमें 90 प्रतिशत मामले बंदरों के काटने से जुड़े हैं। कई परिवार भय के कारण पलायन कर चुके हैं और कुछ मामलों में हमलों से स्थायी शारीरिक क्षति भी हुई है। यह पूरे प्रदेश में विकराल रूप ले चुकी समस्या है। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा व वन मंत्री संजय शर्मा ने आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर शीघ्र ही व्यापक योजना बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

सत्ता पक्ष को भी फटकार

इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष की ओर से कई विधायक खड़े होकर बोलने लगे। इस पर स्पीकर देवनानी ने विधायक हरलाल सहारण का नाम लेकर पुकारा और बोले- सत्ता पक्ष को ज्यादा संयम बरतना चाहिए। जब मैंने व्यवस्था दे दी तो फिर क्यों बोल रहे हो। मैंने उन्हें चेतावनी दे दी, आप मेरे से बड़े हो क्या, आप तय करो, आसन पर आकर बैठो। जब मैं व्यवस्था दे रहा हूं तो पक्ष-विपक्ष को संयम बरतना चाहिए।

दिव्यांग स्कूटी वितरण पर भी टकराव

विधानसभा में सोमवार को दिव्यांग को स्कूटी वितरण से जुड़े सवाल पर सदन में तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक के पूरक प्रश्न के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा टोका-टाकी करने लगे तो सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने जूली व डोटासरा पर तंज कसा। कहा, पूर्व मुख्यमंत्री सदन में बैठे हैं तो दोनों नेताओं के बीच जमकर कम्पीटिशन हो रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए जूली ने कहा कि यह राजनीतिक जवाब नहीं चलेगा, सवाल का जवाब दीजिए। आपने सदन का मजाक बना रखा है।

अविनाश गहलोत ने कहा कि तेज बोलने से झूठ सच नहीं हो जाएगा। इससे पहले मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार के पहले ही बजट में दिव्यांजन के लिए 2000 स्कूटियों की घोषणा की गई थी। जिनका वितरित किया जा चुका है। बजट वर्ष 2025-26 में एप्रोप्रिएशन बिल के रिप्लाई में स्कूटियों की संख्या को बढ़ाकर 2500 किया गया था। इनमें से 2450 स्कूटियों का वितरण किया जा चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि शेष 50 स्कूटियों का वितरण भी 31 मार्च से पहले कर दिया जाएगा।

लिव-इन-रिलेशंस पर माता-पिता की अनुमति अनिवार्य हो शून्यकाल के दौरान विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने लिव-इन-रिलेशंस पर माता-पिता की अनुमति अनिवार्य करने के लिए अधिनियम बनाने का मुद्दा उठाया। राजपुरोहित ने कहा कि घर से भागकर युवक-युवतियां शादी कर रहे हैं और लिव-इन-रिलेशंस में रह रहे हैं। इससे सामाजिक ताने-बाने के साथ ही भारतीय संस्कृति को ठेस पहुंच रही है। परेशान लोग अपने बेटे-बेटियों को स्कूल-कॉलेज छुड़वा देते हैं। प्रेम विवाह के लिए माता-पिता की सहमति हो और 25 साल के बाद हो तो कोई दिक्कत नहीं है।

181 हेल्पलाइन से 90 हजार लाभार्थियों से फीडबैक ले रहे

सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं शिकायतों के त्वरित समाधान की दिशा में विभाग की ओर से नवाचार के रूप में 181 हेल्पलाइन के माध्यम से योजना के 90 हजार लाभार्थियों को कॉल कर फीडबैक लिया जा रहा है। योजना के तहत ऋण वितरण में अनियमितताओं की शिकायत पर बाड़मेर जिले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक को 16 सीसी के तहत कार्रवाई की व निलंबित किया गया।

प्रकरण में संलिप्त शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध भी कार्रवाई की गई। इसके साथ ही धारा 55 के तहत समिति गठित कर प्रकरण की जांच करवाई जा रही है। विधायक कालीचरण सराफ के सवाल के जवाब में कहा कि जयपुर जिलें में कुल 14 हजार 513 गोपालकों द्वारा ऋण के लिए आवेदन किया गया। उनमें से 7852 गोपालकों को लगभग 38 करोड़ 43 लाख की राशि का ऋण वितरण किया जा चुका है।

 

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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