जोधपुर के नागौरी गेट कागा की पहाड़ियों में स्थित शीतला माता मंदिर में होली के बाद शीतला सप्तमी से मेले की शुरुआत की जाएगी। इसको लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है।
खास बात ये है कि मंदिर में शीतला माता के अलावा, गंगा मैया, काग ऋषि मंदिर का भी भव्य रूप में जीर्णोद्धार करवाया गया है। यहां पर प्राचीन भेरू मंदिर में भी इस बार श्रद्धालुओं को सुलभ दर्शन हो इसकी खास व्यवस्था की गई है।
शीतला माता मंदिर के कार्यालय अधिकारी कुलदीप गहलोत ने बताया यहां पर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कच्छवाहा की मॉनिटरिंग में विकास कार्य करवाए गए हैं। जिनमें गंगा माता मंदिर, काग ऋषि मंदिर के जीर्णोद्धार से लेकर भेरूजी, भगवान गणेश आदि मंदिर में विशेष श्रृंगार किया गया है।
इस बार मेले की शुरुआत 10 मार्च को ध्वजारोहण के साथ की जाएगी। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। मेला अमावस्या तक चलेगा। मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य करवाए गए हैं। शीतला माता के मेले को लेकर तैयारियां की जा रही है। इस बार मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पॉलीथिन का प्रयोग बैन रहेगा।

गहलोत ने बताया कि यहां पर दर्शन के साथ ही भेरूजी का दर्शन करने की मान्यता है। यहां पर कोडमदेसर ओर बड़ली वाले भेरूजी स्थापित है। शीतला माता के दर्शन के लिए आने वाला भक्त भेरूजी मंदिर में दर्शन अवश्य करता है।
महाराजा ने जारी किया फरमान
शीतला माता मंदिर की कहानी सदियों पुरानी है। वर्ष 1752 में महाराजा विजय सिंह अपने पिता महाराजा बख्त सिंह की मृत्यु के बाद जोधपुर के सिंहासन पर बैठे। लेकिन अगले वर्ष महाराजा राम सिंह ने उनसे सत्ता छीन ली। 1772 में राम सिंह की मृत्यु के बाद विजय सिंह दोबारा महाराजा बने। कुछ वर्ष बाद चेचक (माता) की बीमारी से उनके बड़े पुत्र की शीतला सप्तमी पर मौत हो गई। इस दुख से आहत महाराजा ने शीतला माता को शहर से बाहर करने का फरमान जारी कर दिया।

इस आदेश के तहत जूनी मंडी स्थित शीतला माता मंदिर से माता की प्रतिमा को उठाकर कागा की पहाड़ियों पर ले जाया गया। कागा क्षेत्र उस समय श्मशान घाट था और उसके पास एक बाग भी था। श्मशान के निकट पहाड़ी पर माता की प्रतिमा रखवा दी गई।




