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याद-ए-रम्ज़ी और महफ़िल-ए-मुशायरा रम्ज़ी इटावी उर्दू और फ़ारसी शाइरी की अज़ीम विरासत:मलका नसीम

याद-ए-रम्ज़ी और महफ़िल-ए-मुशायरा रम्ज़ी इटावी उर्दू और फ़ारसी शाइरी की अज़ीम विरासत:मलका नसीम

न्यूज इन राजस्थान सुनील शर्मा
जयपुर। रम्ज़ी इटावी उर्दू और फ़ारसी शाइरी की अज़ीम विरासत हैं,उनका समग्र साहित्य नई पीढ़ी तक पहुंचाने की ज़रूरत है।यह बात ख्यातनं शाइरा मलका नसीम ने कही। वे राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति में रविवार भारतीय ज्ञानपीठ के संकलनों में शामिल सार्क के पहले सेमिनार में शिरकत करने वाले राजस्थान के मशहूर शाइर रम्ज़ी की बरसी पर याद—ए—रम्ज़ी के मौक़े पर संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने रम्ज़ी इटावी को एक बड़ी शख़्सियत बताते हुए कहा कि उनके साहित्यिक योगदान की चर्चा करके हम गर्व महसूस करते हैं।पिछली सदी के चौथे से आठवें दशक तक उर्दू अदब में रम्ज़ी साहब का डंका बजा करता था। उन्होंने कहा मुझे उनका यह शेर बहुत पसंद है- मैं अगर चाहूं तसव्वुर में करूं उनसे कलाम,मुझको आता है भरी बज़्म में तन्हा होना।मुख्य अतिथि विख्यात आलोचक और शाइर प्रोफ़ेसर मोहम्मद हुसैन ने अपने पत्रवाचन में रम्ज़ी इटावी को उर्दू की अज़ीम शख़्सियत बताते हुए कहा कि उस ज़माने में उर्दू और अंग्रेज़ी में एम.ए.किए हुए रम्ज़ी को अपने फ़न का अल्लामा कहा जा सकता है। वे बहुत उम्दा ग़ज़लें कहते थे।उन्होने कहा कि शाहिद अहमद जमाली की उन पर लिखी गई किताब से पता चला कि रम्ज़ी इटावी का कलाम उर्दू की मशहूर पत्र पत्रिकाओं मे प्रकाशित होता था। दास्ताने अलिफ लैला पर शाइर पत्रिका में उन्होंने सिलसिलेवार 5 आलेख लिखे।वे उर्दू,अरबी,फारसी,अंग्रेजी और तुर्की के विद्वान थे।विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ व्यंग्यकार,लेखक और आलोचक फ़ारूक़ आफ़रीदी ने कहा कि रम्ज़ी इटावी को याद करना सलीकेदार ज़िंदगी को सीखना है।जब हम अपने पुरखों को याद रखेंगे तो हमारी तहज़ीब बची रहेगी, तभी हम भी बचेंगे।वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र बोड़ा ने कहा कि रम्ज़ी इटावी का साहित्य कालातीत है,हमें अपने बुज़ुर्गों की रिवायत और विरासत को याद रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि रम्ज़ी इटावी पर नेशनल सेमिनार करने की आवश्यकता है। डॉ.ज़ीनत कैफ़ी ने अपने पत्रवाचन में रम्ज़ी के काम पर एक विहंगम दृष्टि डालते हुए कहा कि उस शाइर ने राजस्थान की धरती पर उर्दू और फ़ारसी की परंपरा को बचाए रखा।कन्वीनर ज़ीनत कैफ़ी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के इटावा में 1912 में जन्मे रम्ज़ी इटावी सन 1932 में जोधपुर आए।उन्होंने जीवन का श्रेष्ठ साहित्य जोधपुर में रह कर रचा।

       शानदार मुशायरा आयोजित

इस मौक़े पर मशहूर शाइरा मलका नसीम की की अध्यक्षता,रेशमा ख़ान के मुख्य आतिथ्य और प्रोफ़ेसर मोहम्मद हुसैन विशिष्ट आतिथ्य में हुए मुशायरे में आदिल रज़ा मंसूरी,डॉ.ज़ीनत कैफ़ी,एम आई ज़ाहिर,ऐजाज़ुल हक़ शिहाब, फारूक आफरीदी,शैलेंद्र सुधर्मा,सुहैल हाशमी व डॉ इमरान कैफ़ ने कलाम पेश कर रंग जमाया।संयोजन ऐज़ाज़ुल हक़ शिहाब ने किया।इसमें गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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Author: newsinrajasthan

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