जयपुर के बस्सी के बैनाड़ा गांव की शालीमार सील एंड टार प्रोडक्ट कंपनी में 23 मार्च की शाम को एक ब्लास्ट में 7 मजदूरों की मौत हो गई।
इतना बड़ा हादसा किसकी लापरवाही से हुआ? असली कारण क्या थे, इसके पीछे तीन वजहें जांच के दायरे में हैं। एफआईआर के हिसाब से सुरक्षा मानकों को ताक पर रखा गया था, जिससे बॉयलर में विस्फोट हुआ।
कंपनी मालिक ने दावा किया कि मजदूरों ने ज्वलनशील केमिकल के पास जलती बीड़ी फेंक दी, जिससे आग लगी। इस हादसे की असली परतें फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट से खुलेंगी।
सबसे पहले बताते हैं हादसा क्या था?
जयपुर शहर से 25 किलोमीटर दूर बस्सी के पास बैनाड़ा गांव में शालीमार सील एंड टार प्रोडक्ट कंपनी की फैक्ट्री में शाम 6.30 बजे के करीब एक धमाका हुआ। तब फैक्ट्री के अंदर 10-12 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके वाली जगह पर 7 थे, बाकी इधर-उधर थे। इनमें से 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। 2 गंभीर घायलों ने इलाज के दौरान एसएमएस हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया।
1. थाने में दर्ज FIR : मृतक के भतीजे ने बॉयलर मेंटेनेंस में लापरवाही का मामला दर्ज करवाया
हादसे में मारे गए किशन कुमार के भतीजे राजेश की तहरीर पर बस्सी पुलिस ने कंपनी के चेयरमैन सुभाष पराशर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एफआईआर में आरोप है कि बॉयलर का मेंटेनेंस नहीं किया जाता था। बॉयलर फटने से हादसा हुआ, जिसमें उसके चाचा कृष्ण कुमार गुर्जर समेत हीरालाल गुर्जर, बाबू लाल मीणा, गोकुल हरिजन, भगवान सहाय शर्मा, कालूराम और मनोहर की मौत हो गई।
एडिशनल डीसीपी आशाराम चौधरी ने बताया कि कंपनी में बॉयलर के इस्तेमाल में क्या लापरवाही रही, इसकी जांच टेक्निकल टीम कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि आग लगने का कारण क्या था? 7 लोगों की मौत हुई है, मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है?
2. कंपनी मालिक का दावा- फैक्ट्री में बॉयलर था ही नहीं, मजदूर ने फेंकी जलती बीड़ी
मामले में भास्कर टीम ने कंपनी के चेयरमैन सुभाष पाराशर से टेलीफोन पर संपर्क किया तो उन्होंने एफआईआर के एकदम उलट दावा किया। बताया कि फैक्ट्री में कोई बॉयलर था ही नहीं। हादसा, ज्वलनशील केमिकल में आग लगने से हुआ।
उन्होंने आशंका जताई कि किसी मजदूर ने वहां जलती हुई बीड़ी फेंक दी, जिसके कारण आग लग गई और इतना बड़ा हादसा हो गया।
कंपनी में कैसे पहुंची जलती बीड़ी?
कंपनी मालिक के दावों पर सवाल भी उठता है कि ज्वलनशील पदार्थ की कंपनी में बीड़ी पीने की छूट किसने दी? क्या वहां सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं होता था? क्या मजदूरों की जान जाने के लिए जिम्मेदार कंपनी संचालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए?
होली में छुट्टी पर जाने के लिए मजदूर कर रहे थे ओवरटाइम
बस्सी थानाधिकारी राजीव बताते हैं कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि घटना के समय फैक्ट्री में सात मजदूर 23 मार्च को ओवरटाइम काम कर रहे थे। इस दौरान एक मजदूर को जानकार को खाना देने जाना था। वह बाहर जा रहा था। इस दौरान शाम 6.30 बजे जोरदार धमाका हुआ। लोग मौके पर पहुंचे तो पाया कि फैक्ट्री में आग भड़की हुई है। पांच मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी। गनीमत रही कि हादसे से करीब डेढ़ घंटे पहले छह महिला मजदूर वहां से निकल गई थीं।
कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं करवाए गए थे विशेष सूट
बस्सी थानाधिकारी राजीव ने प्रारंभिक जांच में पाया कि घटना के समय मजदूरों ने किसी प्रकार का सूट नहीं पहन रखा था। वह साधारण कपड़ों में थे।
स्थानीय लोगों का भी यही आरोप है कि कंपनी प्रबंधकों ने कर्मचारियों को काम करने के दौरान किसी तरह के विशेष सूट भी नहीं उपलब्ध करवाए थे। फैक्ट्री में मजदूरों को खुद के रिस्क पर काम करना पड़ रहा था। जबकि जहां ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल होता है, वहां खास सावधानियां बरती जाती हैं। साथ ही काम करने वालों को सेफ्टी उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाते हैं।
3. एफएसएल टीम को फैक्ट्री में मिले संकेत, ग्राइंडर स्पीड बढ़ाने से हादसे की आशंका
इस हादसे के कारण पर तीसरी थ्योरी शॉर्ट सर्किट होना है। शनिवार को हुए हादसे के अगले दिन एफएसएल टीम ने रविवार शाम घटनास्थल खंगाला। एफएसएल एक्सपर्ट ने ग्राइंडर की ओवरस्पीड के चलते हादसा होने की आशंका जताई।
कंपनी में केमिकल बनाने के लिए रोड़ी जैसे पत्थर को पीसा जाता है। इसके लिए ग्राइंडर को तय स्पीड पर चलाया जाता है। प्राथमिक जांच में प्रतीत होता है कि ग्राइंडर की स्पीड बढ़ा दी गई थी, जिसकी वजह से उसमें शॉर्ट सर्किट से विस्फोट हो गया।
आसपास काफी मात्रा में ज्वलनशील केमिकल (थिनर- एक तरह से स्प्रिट होता है) के ड्रम रखे थे, विस्फोट से निकली चिंगारी के चलते आग भड़क उठी। ज्वलनशील केमिकल की वजह से आग इतनी तेजी से भड़की कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
एडिशनल डीसीपी आशाराम चौधरी ने बताया- इस फैक्ट्री में रोड और टाइल्स बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल तैयार होता है। इसमें काफी ज्वलनशील केमिकल का इस्तेमाल होता है। हादसे के असली कारण क्या रहे यह अभी जांच का विषय है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनी का कारोबार, फिर भी नहीं अग्निशमन के उपाय
जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ है, उसका कारोबार यूएसए, यूएके, दुबई, कनाड़ा, आस्ट्रेलिया, चेकस्लोवाकिया, फ्रैंकफोर्ट जैसे दर्जन भर से अधिक देशों में फैला हुआ है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने वर्ष 2018 में कंपनी को बेहतरीन परफार्मेंस के लिए 100 (स्मॉल एंड मीडियम साइज एंटरप्राइज) एसएमई अवार्ड से भी नवाजा था। लेकिन, कंपनी के द्वारा तय मानकों के अनुसार कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया।
हादसे के बाद बचाव के लिए पहुंची सिविल डिफेंस टीम के अमित शर्मा कहते हैं – जब हम पहुंचे तो मौके पर आग और धमाके से फैला मलबा चारों ओर फैला था। हमारी पहली जिम्मेदारी मजदूरों की जान बचाने की थी। हम उसमें लग गए। आग बुझाने के कोई उपकरण नजर तो नहीं आए, हो सकता है कि मलबे में दब गए हों।
मौके पर मौजूद स्थानीय नागरिक शुभम गुप्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी में सुरक्षा संबंधी उपायों की अनदेखी हमेशा होती रही है। अंदर काम करने वाले मजदूरों को किसी भी खतरे से निपटने के लिए न कोई ट्रेनिंग दी गई, न अग्निशमन के कोई उपाय किए गए हैं। स्थानीय ग्रामीण रोजगार के लालच में अपनी जान से हर रोज खेलते हैं। उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है।
क्यों फटता है बॉयलर?
सिविल डिफेंस से जुड़े अमित शर्मा ने बताया कि बॉयलर में ऑटोमेटिक वाल्व होते हैं, लेकिन अगर समय पर मेंटेनेंस नहीं किया जाए तो कई वाल्व काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में प्रेशर दूसरे वाल्व पर आता है। प्रेशर बढ़ने के कारण स्टीम का फ्लो थम जाता है। इससे बॉयलर फट जाता है। ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियमित रखरखाव, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन, बॉयलर का नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
बस्सी थानाधिकारी राजीव ने बताया कि उन्हें जो रिपोर्ट मिली है उसमें बॉयलर फटने से हादसा होना बताया गया है। इसकी जांच की जा रही है कि बॉयलर फटा था या ग्राइंडर में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इसकी पुष्टि एफएसएल की जांच में ही हो पाएगी।






