मनोहरपुर-कौथून राष्ट्रीय राजमार्ग-148 पर सड़क हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। इन दुर्घटनाओं में कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खोया है। मौतों और घायलों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई केवल घोषणाओं तक ही सीमित है।
इस हाईवे पर रायसर, आंधी और सैथल थाना क्षेत्रों में लगातार गंभीर हादसे हो रहे हैं। अकेले रायसर इलाके में पिछले साढ़े चार साल में 99 लोगों की मौत हो चुकी है। सैथल थाना क्षेत्र में 2021 से 2025 के बीच पांच वर्षों में 84 हादसों में 72 मौतें और 77 लोग घायल हुए हैं।
हादसों में गंभीर रूप से घायल लोगों को जयपुर, चंदवाजी स्थित निम्स या दौसा के अस्पतालों में ले जाया जाता है। इन अस्पतालों तक पहुंचने में लगने वाला समय अक्सर जानलेवा साबित होता है। इसी स्थिति को देखते हुए रायसर में एक ट्रोमा सेंटर की घोषणा की गई थी, लेकिन यह सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
फोरलेन की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बन जाने के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है। इसी तरह, परिवर्तित बजट में मिली ट्रोमा सेंटर की सौगात भी पिछले 15 महीनों से केवल कागजों में ही है। न तो इसका शिलान्यास हुआ है और न ही निर्माण कार्य शुरू हो पाया है।
ट्रोमा सेंटर की घोषणा के बाद चिकित्सा विभाग ने 20 नवंबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में क्रमोन्नत करने की घोषणा की थी। 16 दिसंबर 2024 को ट्रोमा सेंटर निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी कर दी गई थी। इसके बावजूद, एक साल बाद भी सीएचसी केवल रिकॉर्ड में चल रही है, जबकि सुविधाएं पीएचसी जैसी ही हैं।
ओपीडी समय के बाद सीएचसी में ताला लग जाता है, जिससे हाईवे हादसों के घायलों, गर्भवती महिलाओं और आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सीएचसी को नियमानुसार 24 घंटे संचालित किया जाए।
इस संबंध में संयुक्त निदेशक, जोन जयपुर, डॉ. युवराज सिंह नाथावत ने बताया कि ट्रोमा सेंटर निर्माण के लिए भूमि संबंधी कागजात मंगवाए जा रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक-दो दिन में सीएचसी का दौरा कर सुविधाओं को सुचारू करवाया जाएगा।






