जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज (एसएमएस) ने रैगिंग के आरोप में 17 छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई एक स्टूडेंट की तरफ से नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) में दर्ज शिकायत के आधार पर की गई।
दरअसल, एक फर्स्ट ईयर स्टूडेंट ने शिकायत दर्ज करवाई की कि सेकेंड ईयर के कुछ स्टूडेंट, जो आनंदपुरी कॉलोनी में किराए के मकान में रहते हैं, उसे और अन्य साथियों को तंग कर रहे हैं।
स्टूडेंट की शिकायत- रैगिंग से मानसिक परेशानी
शिकायत के अनुसार आरोपी सीनियर स्टूडेंट उनसे बार-बार नाम पूछते हैं। कभी कहते हैं कि गाना गाकर सुनाओ। कभी मुर्गा बनवा देते हैं। बार-बार रैगिंग से उन्हें मानसिक परेशानी हो रही है।
इन सबसे परेशान होकर स्टूडेंट ने इसकी शिकायत NMC पोर्टल पर की। इसके बाद SMS कॉलेज प्रशासन की तरफ से बनाई एंटी रैगिंग कमेटी ने शिकायत की जांच की।
कमेटी ने एक्शन लेते हुए 17 स्टूडेंटों को अगले आदेशों तक कॉलेज की क्लास में आने पर रोक लगाते हुए सस्पेंड किया है।
आरोपियों में 16 स्टूडेंट सेकेंड ईयर के
एंटी रैगिंग कमेटी की चेयरमेन और अतिरिक्त प्रिंसिपल डॉ. मोनिका जैन ने बताया- जिन छात्रों काे सस्पेंड किया है, उनके परिजनों को इसकी सूचना भेजी है।
इसके साथ ही अन्य दूसरे छात्रों से रैगिंग न हो इसके लिए हॉस्टल वार्डन को भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जिन स्टूडेंट्स को सस्पेंड किया गया है उनमें 16 सेकेंड ईयर के हैं।
जबकि, एक स्टूडेंट की एमबीबीएस कम्पलीट हो गई है और वह इंटर्नशिप कर रहा है
साल 2024 मिली थीं 165 शिकायतें
एनएमसी को साल 2024 में देशभर से 165 रैगिंग की शिकायतें मिली थीं। आयोग के अनुसार राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की 15 शिकायतें सामने आई थीं। सबसे ज्यादा 33 शिकायत उत्तर प्रदेश से मिली थीं। वहीं, बिहार से 17 शिकायत एनएमसी को ऑनलाइन मिली थीं।
परिस्थितियां जब ऐसी बनें
- जब स्टूडेंट का दाखिला होता है तो उसे घुलने-मिलने में समय लगता है। जब वो रैगिंग का शिकार होता है और घर पर बताता है तो पेरेंट्स कहते हैं बेटा बड़ी मुश्किल से एडमिशन मिला है। रैगिंग के नाम पर थोड़ा-बहुत हंसी-मजाक चलता ही है। सब ठीक हो जाएगा, लेकिन कई बार तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
- तब क्या करना चाहिए: पहले तो पेरेंट्स के लिए भी सेंसेटाइजेशन कार्यक्रम रखना चाहिए। फोन पर स्टूडेंट रैगिंग के बारे में बात करे तो इसे गंभीरता से लें। कॉलेज मैनेजमेंट से पेरेंट्स को मिलते रहना चाहिए।
- हॉस्टल में क्या कुछ हो रहा पता नहीं चलता। जूनियर छात्रों पर सीनियर्स दबाव बनाते हैं। हॉस्टल की बालकनी या मेन गेट पर भी CCTV कैमरे नहीं होते, इसलिए रैगिंग पकड़ में नहीं आती।
- तब क्या करना चाहिए: डॉक्टरों की टीम बनाई जाए। हॉस्टलों में लगातार छापे मारे जाएं। कभी शाम 7 तो कभी रात 8 बजे भी अटेंडेंस ली जाए। रैगिंग गलत चीज है इसके बारे में सभी छात्रों को मैसेज जाना चाहिए।
- सीनियर्स अपनी मनमानी करते हैं। रैगिंग हो रही है इसका पता ही नहीं चलने देते। पीड़ित स्टूडेंट डर के मारे एंटी रैगिंग कमेटी को भी नहीं बताते। वो जानते हैं कि सीनियर्स को पता चला तो उनके साथ और ज्यादा रैगिंग होगी।
- तब क्या किया जाए: हॉस्टल में फ्लोर परफेक्ट का कांसेप्ट लाना चाहिए। फ्लोर परफेक्ट उन सीनियर्स को बनाना चाहिए जो हॉस्टल में होने वाली रैगिंग की रिपोर्ट कर सकें। अगर रैगिंग हो रही है तो तत्काल अलर्ट बटन दबाएं और मैनेजमेंट को सूचित करें। ऐसा करके रैगिंग रोकी जा सकेगी।






