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प्रदेश के हर जिले में होगा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन,रामसर स्थल सिलिसेढ़ बनेगा मॉडल

राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की तकनीकी समिति की बैठक मंगलवार को सचिवालय में शासन सचिव पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग विजय एन की अध्यक्षता में आयोजित की गई। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में चरणबद्ध रूप से कम से कम एक आर्द्रभूमि विकसित की जाए। उन्होंने इसके लिए जिला-वार आर्द्रभूमियों की सूची तैयार कर उनका डिजिटलीकरण, नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि अलवर जिला स्थित सिलिसेढ़ झील को आदर्श आर्द्रभूमि (मॉडल वैटलैण्ड) के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिए स्थानीय प्रशासन, वन एवं पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं पशुपालन विभाग आपसी सहभागिता से कार्य करने के लिए कहा।

शासन सचिव ने कहा कि सिलिसेढ़ झील के विकास से प्रदेश की अन्य आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से पर्यटन दबाव, जलग्रहण क्षेत्र का क्षरण, गाद जमाव, पारिस्थितिकी संतुलन को नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों के प्रबंधन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों पर चर्चा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

उन्होंने प्रत्येक जिले में आर्द्रभूमि विकसित करने के एक्शन प्लान तथा आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं प्रबंधन हेतु बजट के संबंध में भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिये कि जिन जिलों में अब तक आर्द्रभूमियाँ अधिसूचित नहीं हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र भेजे जाएं। साथ ही जिलों में आर्द्रभूमियों की डिजिटल इन्वेंट्री समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।

बैठक में राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की नॉलेज पार्टनर संस्था डब्लूडब्लूएफ इंडिया द्वारा रामसर साइट सिलिसेढ़ झील (अलवर) के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। प्रस्तुतीकरण में झील की भौगोलिक स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, जल प्रवाह व्यवस्था, जल गुणवत्ता, जलवायु आंकड़े, आर्द्रभूमि स्वास्थ्य, जैव विविधता तथा भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि सिलिसेढ़ झील सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बफर क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण रामसर साइट है। यह क्षेत्र की जल सुरक्षा, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। झील में 149 पक्षी प्रजातियाँ, विभिन्न मछली प्रजातियाँ, स्तनधारी एवं सरीसृप पाए जाते हैं। इस प्रारूप कार्ययोजना के अनुसार सिलीसेढ़ झील के संवर्धन एवं विकास हेतु सभी संबंधित विभागों एवं हित धारकों के समन्वय से नियमानुसार कार्य किए जाएंगे।

बैठक में विशिष्ट शासन सचिव पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बीजो जॉय, वन संरक्षक वन्य जीव वन विभाग मोनाली सेन, सदस्य सचिव राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल कपिल चंद्रावल, सहित पशुपालन विभाग, भू जल विभाग, स्टेट रिमोट सेंसिंग सेंटर के प्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही जिला प्रशासन- अलवर ने वीसी द्वारा भाग लिया ।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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